दिल्ली विश्व विद्यालय के 98वें दीक्षांत कार्यक्रम में शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दावा किया कि हिंदुस्तान दुनिया का ‘इकलौता राष्ट्र’ है जिसने कभी हमला नहीं किया और ना ही दूसरे राष्ट्रों की एक इंच जमीन हड़पी. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन के दौरान राजनाथ ने कहा कि हिंदुस्तान की संदेह्ति दुनिया के कल्याण के लिए है, ना कि किसी को डराने के लिए. दीक्षांत कार्यक्रम के दौरान 1,73,443 विद्यार्थियों को डिजिटल डिग्री से सम्मानित किया गया. राजनाथ ने कहा, ‘‘हमारा सपना हिंदुस्तान को जगत गुरु बनाना है. हम राष्ट्र को संदेह्तिशाली, समृद्ध, ज्ञानी और मूल्यवान बनाना चाहते हैं.
हिंदुस्तान इकलौता ऐसा राष्ट्र है जिसने कभी किसी दूसरे राष्ट्र पर हमला या उसकी एक इंच जमीन पर कब्जा नहीं किया.’’ रक्षा मंत्री के अनुसार अब दुनिया भी मानती है कि हिंदुस्तान कभी ज्ञान और विज्ञान सहित कई क्षेत्रों में विश्व में अग्रणी था. उन्होंने कहा कि कई तथाकथित प्रगतिवादी हैं जो राष्ट्र की सांस्कृतिक उत्कृष्टता को धूमिल करने समेत प्रश्न खड़े करते हैं. रक्षा मंत्री ने कहा कि आजादी के इस अमृत काल में, जब राष्ट्र आजादी के 75 वर्ष का उत्सव मना रहा है, हमें समानता, सद्रेट और ज्ञान की महान परंपरा को याद करना चाहिए और एक षड्यंत्र के अनुसार हमारे अंरेट भरे गए जहर को दूर करने का कोशिश करना चाहिए.
उन्होंने प्राचाइना ऋषियों, वैज्ञानिकों और विद्वानों के नामों का हवाला देते हुए कहा कि हिंदुस्तान विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी था, लेकिन सदियों की अधीनी के कारण कई लोग इस बात से अनजान थे. उन्होंने कहा कि ‘शून्य’ की अवधारणा हिंदुस्तान द्वारा दी गई थी, श्रीधराचार्य ने द्विघात समीकरण दिया था, पाइथागोरस के 300 वर्ष पहले पाइथागोरस प्रमेय बोधायन ने दिया था. उन्होंगे आगे बताया कि इस राष्ट्र में ईसा मसीह से पहले सर्जरी की गई, कॉपरनिकस से पहले आर्यभट्ट ने पृथ्वी के सरगनार की व्याख्या करके बता दिया था कि यह अपनी धुरी पर घूमती है.
राष्ट्र की आध्यात्मिक संदेह्ति के बारे में बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि स्टीव नौकरी्स और मार्क जुकरबर्ग जैसे लोग भी मुसीबत के समय खामोशि के लिए नैनीताल के पास कांची धाम में नीम करोली बाबा के पास गये. उन्होंने युवाओं से राष्ट्र के भलाईों के विरूद्ध किसी भी गतिविधि में शामिल होने से बचने का संकल्प लेने का आह्वान किया. गुनाही आतंकवादियों अफजल गुरु, याकूब मेमन और अमेरिका स्थित ट्विन टावरों के हमलावरों के नामों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह गलत धारणा है कि आतंकवाद का कारण गरीबी और शिक्षा की कमी है. कार्यक्रम के दौरान सिंह ने विद्यार्थीों को 197 पदक भी प्रदान किए. रिकॉर्ड संख्या में लोगों को 802 चिकित्सकेट डिग्री से सम्मानित किया गया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करने वाले कुलपति योगेश सिंह के बताया कि यूनिवर्सिटी इस वर्ष 1 मई को 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है.