शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को विश्वास जताया कि महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले बागी खेमे के साथ कानूनी लड़ाई में उनका खेमा विजयी होगा. सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले खेमे की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही है, जिसमें निर्वाचन आयोग को ‘‘असली” शिवसेना को लेकर शिंदे के नेतृत्व वाले खेमे के दावे पर फैसला लेने से रोकने का निवेदन किया गया है.
इसने निर्वाचन आयोग से शिंदे खेमे की याचिका पर कोई आदेश पारित नहीं करने के लिए बोला था जिसमें बोला गया था कि उसे ‘‘असली” शिवसेना माना जाए और पार्टी का चुनाव चिह्न दिया जाए. पीठ ने बोला था कि याचिकाएं संविधान की 10वीं अनुसूची से जुड़े कई अहम संवैधानिक मुद्दों को उठाती हैं, जिनमें अयोग्यता, अध्यक्ष एवं गवर्नर की शक्तियां और न्यायिक समीक्षा शामिल है.
संविधान की 10वीं अनुसूची में निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों के उनके सियासी दलों से दलबदल की रोकथाम का प्रावधान है और इसमें दलबदल के विरूद्ध कड़े प्रावधान हैं. ठाकरे खेमे ने पहले बोला था कि शिंदे के प्रति निष्ठा रखने वाले पार्टी विधायक किसी अन्य सियासी दल के साथ विलय करके ही संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार अयोग्यता से स्वयं को बचा सकते हैं. शिंदे खेमे ने दलील दी थी कि दलबदल रोधी कानून उस नेता के लिए कोई आधार नहीं है जिसने अपनी ही पार्टी का विश्वास खो दिया है.