बेंगलुरु, 12 जून (आईएएनएस). बीजेपी की कर्नाटक यूनिट अगले दो दिनों में विधानसभा में नेता विपक्ष और राज्य के अगले अध्यक्ष के नामों का निर्णय कर लेगी.
पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के पुत्र बीवाई विजयेंद्र ने भी बोला था कि पार्टी दो दिनों में नेता विपक्ष के नाम पर निर्णय लेगी. हालांकि, उन्होंने कर्नाटक के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी आलाकमान पर छोड़ने की बात भी दोहराई थी.
बड़ी बात ये है कि स्वयं के प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के प्रश्न पर विजयेंद्र ने बोला था कि इस बारे में पार्टी के भीतर किसी तरह की बात नहीं हुई है. उन्होंने जोर देते हुए बोला था कि कौन कर्नाटक भाजपा का अध्यक्ष बनता है, ये कोई मामला नहीं है. हम लोग एक साथ मिलकर कर्नाटक में पार्टी को मजबूत करेंगे.
बीवाई विजयेंद्र ने उस प्रश्न का उत्तर देने से भी इनकार कर दिया, जिसमें पूछा गया था कि कर्नाटक चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा, क्योंकि उनके पिता येदियुरप्पा को पद छोड़ने के लिए बोला गया था.
बीजेपी सूत्रों की मानें तो पूर्व सीएम बसवराज बोम्मई, वरिष्ठ नेता बसनगौड़ा पाटिल और अरविंद बेलाड विधानसभा में नेता विपक्ष बनने की रेस में शामिल हैं. हालांकि, पार्टी येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र को पद देने की सोच रही है. ओबीसी और दलित चेहरे को भी नेता विपक्ष बनाने की बात की जा रही है.
ऐसी भी आसार जताई जा रही है कि भाजपा एमएलसी कोटा श्रीनिवास पुजारी को नेता विपक्ष बनाया जा सकता है. इसके अतिरिक्त वोक्कालिगा नेता को भी कर्नाटक भाजपा की जिम्मेदारी दी जा सकती है. इसमें आर अशोक, सीएन अश्वथ नारायण भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की रेस में शामिल हैं.
हालांकि, अभी तक प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर आखिरी निर्णय नहीं हुआ है. भाजपा लिंगायत, वोक्कालिगा, ओबीसी या दलित चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहती है, जिससे राज्य के सभी समुदायों को अगुवाई देने का संदेश दिया जा सके.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और नेता विपक्ष के दोनों पदों पर मजबूत उम्मीदवारों को खोज रही है. इन सबके बीच कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने अपने कैबिनेट मंत्रियों को आरएसएस और हिंदुत्व ताकतों से मुकाबला करने के साथ ही भाजपा पर जुबानी हमला करने का पूरा अधिकार दे दिया है.
कांग्रेस नेता पूर्व की भाजपा गवर्नमेंट में आरएसएस से नजदीकी संबंध रखने वाली संस्थाओं को मिली संपत्तियों को वापस लेने पर भी पुनर्विचार कर रहे हैं. इससे भाजपा नेताओं में हड़कंप मची हुई है.
कांग्रेस को आरएसएस को बैन करने की चुनौती देने वाले भाजपा नेता भी शान्त हैं. बताया जा रहा है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता विपक्ष के लिए वैसे चेहरे को खोज रही है जो सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को सदन के भीतर और बाहर कड़ी चुनौती दे सके.