- कांग्रेस का आरोप, यह माकपा-बीजेपी के बीच मिलीभगत को दर्शाता है
- केरल की तुलना में उत्तर भारतीय बच्चों की बेहतर देखभाल करते हैं: मेयर
- ‘RSS के आयोजन में भाग लेने के दौरान मेयर का दिया भाषण ठीक नहीं’
केरल के कोझिकोड की मेयर बीना फिलिप के आनें वाले श्रीकृष्ण जयंती कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने से केरल में टकराव खड़ा हो गया है. विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और बीजेपी (BJP) के बीच मिलीभगत को दर्शाता है.
‘कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान दिया गया भाषण ठीक नहीं था’
माकपा ने एक बयान में कहा, “कोझिकोड नगर निगम की मेयर बीना फिलिप की ओर से RSS के अनुसार एक संगठन की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान दिया गया भाषण ठीक नहीं था. उस विशेष मामले के प्रति मेयर का रुख पार्टी के एकदम उल्टा है. माकपा इसे स्वीकार नहीं सकती. पार्टी ने मेयर के रुख की सार्वजनिक रूप से निंदा करने का निर्णय किया है.”
‘बयानों को दुर्भावनापूर्ण इरादे से तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया’
इस बीच, मेयर ने मीडिया से बोला कि उनके बयानों को दुर्भावनापूर्ण इरादे से तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया. विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने बोला कि वाम मोर्चा गवर्नमेंट ने अपनी वामपंथी पहचान खो दी है और उस मोर्चे के सहयोगी भी इस तरह के घटनाक्रम से नाखुश हैं.
कांग्रेस नेता सतीशन बोले- माकपा अभी चुप क्यों है?
कांग्रेस नेता सतीशन ने कहा, “माकपा अभी चुप क्यों है? उन्होंने हाल में मेरी एक पुरानी तस्वीर निकालकर बड़ा मामला बनाया, जिसमें मैंने स्वामी विवेकानंद पर एक पुस्तक का विमोचन किया था. मेयर ने बोला कि उनकी पार्टी ने किसी को भी इस तरह के किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने से प्रतिबंधित नहीं किया है. इसका मतलब है कि उन्होंने पार्टी की जानकारी के साथ कार्यक्रम में शिरकत की.”
‘उत्तर भारतीय बच्चों की बेहतर देखभाल करते हैं’
फिलिप ने अपने भाषण में बोला कि केरल में बच्चों की देखभाल उतनी अच्छी नहीं होती है, जितनी उत्तर हिंदुस्तान में होती है. उन्होंने रविवार को अपने भाषण में बोला था, “बाल मौत रेट कम होने का मतलब यह नहीं है कि बच्चों की देखभाल अच्छी है. इसके लिए हमें अपने बच्चों को उत्तर हिंदुस्तानियों की तरह प्यार करना सीखना होगा.” फिलिप ने बोला था कि केरलवासी अपने बच्चों को लेकर स्वार्थी हैं और दूसरे बच्चों के साथ अलग व्यवहार करते हैं, लेकिन उत्तर हिंदुस्तान में हर बच्चे की समान देखभाल की जाती है.