जबलपुर राज्य के महाकोशल क्षेत्र का केन्द्र है और यहां आदिवासी मतदाताओं संख्या बेहद है. 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने आठ जिलों के इस संभाग में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 13 सीटों में से 11 पर जीत हासिल की जबकि शेष दो सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी.
जबलपुर. प्रियंका गांधी वाद्रा वर्ष के अंत में होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी के प्रचार अभियान की आरंभ सोमवार को जबलपुर से नर्मदा तट पर पूजा-अर्चना करने के बाद करेंगी. पार्टी के एक नेता ने यह जानकारी दी.
जबलपुर राज्य के महाकोशल क्षेत्र का केन्द्र है और यहां आदिवासी मतदाताओं संख्या बेहद है. 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने आठ जिलों के इस संभाग में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 13 सीटों में से 11 पर जीत हासिल की जबकि शेष दो सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी.
जबलपुर के महापौर और कांग्रेस पार्टी के शहर प्रमुख जगत बहादुर सिंह ने रविवार को पीटीआई/से कहा, ‘‘प्रियंका जी शनिवार को सुबह करीब 11.15 बजे शहीद स्मारक में एक जनसभा को संबोधित कर पार्टी के चुनाव अभियान और संकल्प 2023 की आरंभ करेंगी. वह सुबह करीब 10:30 बजे जबलपुर पहुंचेगीं और नर्मदा नदी की पूजा करने के लिए ग्वारीघाट जाएंगी.
उन्होंने बोला कि रैली स्थल के रास्ते में प्रियंका मुगलों से लड़के हुए शहीद हुई रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगी.
उन्होंने बोला कि रैली में कम से कम दो लाख लोगों के शामिल होने की आसार है.
उन्होंने दावा किया, ‘‘महाकोशल क्षेत्र या आठ जिलों वाले जबलपुर संभाग के लोग स्वयं को बीजेपी द्वारा उपेक्षित महसूस करते हैं. हमने इस क्षेत्र में (पिछली बार) अच्छा प्रदर्शन किया था. इस बार चुनाव में हम बहुत बढ़िया प्रदर्शन करने वाले हैं.’’
यह पूछे जाने पर कि उन्होंने पार्टी के प्रचार अभियान के लिए जबलपुर को क्यों चुना, मध्य प्रदेश से कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने बोला कि रैली महाकोशल में आयोजित की जा रही है क्योंकि राहुल गांधी की हिंदुस्तान जोड़ो यात्रा इस क्षेत्र से होकर नहीं गुजरी थी.
उन्होंने कहा, महाकोशल क्षेत्र में रैली से पड़ोसी विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्रों में कांग्रेस पार्टी को सहायता मिलेगी.
इसके अलावा, महाकोशल में मजबूत सत्ता विरोधी लहर (भाजपा गवर्नमेंट के खिलाफ) है और कांग्रेस पार्टी के पारंपरिक आदिवासी मतदाताओं की बड़ी जनसंख्या इस क्षेत्र में रहती है.