विपक्षी ‘इंडियन नेशनल डेमोक्रेटिक इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) गठबंधन को दोहरा झटका देते हुए पश्चिम बंगाल और पंजाब के मुख्यमंत्रियों ने बुधवार को बोला कि आनें वाले लोकसभा चुनावों में उनके राज्यों में उनके दलों का कांग्रेस पार्टी से कोई गठबंधन नहीं होगा।
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कांग्रेस पार्टी और तृणमूल कांग्रेस पार्टी (टीएमसी) के बीच सीटों के बंटवारे पर चल रहे विवाद के बीच आज अचानक घोषणा की कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में अकेले लोकसभा चुनाव में उतरेगी।इसी तरह की घोषणा पंजाब के सीएम भगवंत मान ने की है।
बनर्जी के बयान कांग्रेस पार्टी नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘भारत जोड़ो इन्साफ यात्रा’ के पश्चिम बंगाल में प्रवेश करने से एक दिन पहले आये हैं।
ममता बनर्जी ने हावड़ा जिले में दुमुरजला हैलीपैड पर संवाददाताओं से वार्ता में कहा, ‘‘मैंने उन्हें (कांग्रेस को) सीटों के बंटवारे पर एक प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने प्रारम्भ में ही इसे नकार दिया। हमारी पार्टी ने अब बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय किया है।’’
बनर्जी ने यह भी बोला कि पार्टी का राज्य में कांग्रेस पार्टी से कोई रिश्ता नहीं होगा।
मुख्यमंत्री ने सीटों के बंटवारे पर चर्चा को लेकर मीडिया में आ रही खबरों का भी खंडन किया और बोला कि उन्होंने इस मामले पर कांग्रेस पार्टी में किसी से भी बात नहीं की है।
आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी से टकराने के लिए कुल 28 विपक्षी दलों ने ‘इंडिया’ गठबंधन का गठन किया था।
सूत्रों के अनुसार, ममता की पार्टी की ओर से 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रदर्शन को देखते हुए उसे सिर्फ़ दो सीट देने की पेशकश की गयी है जिसे लेकर दोनों दलों के बीच खींचतान बढ़ गयी है। पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीट हैं।
पश्चिम बंगाल में सीट बंटवारे के मामले पर तृणमूल कांग्रेस पार्टी के साथ गतिरोध के बीच कांग्रेस पार्टी ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल की सीएम और तृणमूल कांग्रेस पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के बिना विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की कल्पना नहीं की जा सकती।’’
पार्टी की ‘भारत जोड़ो इन्साफ यात्रा’ के दौरान असम के उत्तरी सलमारा में कांग्रेस पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने संवाददाताओं से वार्ता में यह आशा भी जताई कि पश्चिम बंगाल में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ एकसाथ चुनाव लड़ेगा।
रमेश ने कहा, ‘‘आपने ममता जी का पूरा बयान नहीं पढ़ा है। पूरा बयान है कि हम बीजेपी को हराना चाहते हैं और बीजेपी को हराने के लिए कोई कदम पीछे नहीं लेंगे। उसी भावना के साथ हम (भारत जोड़ो इन्साफ यात्रा) पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर रहे हैं।’’
भाजपा ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया में दावा किया कि बनर्जी का निर्णय उनकी हताशा को दर्शाता है और यह ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए ‘मौत की घंटी’ के समान होगा।
पंजाब के सीएम भगवंत मान ने चंडीगढ़ में बोला कि उनकी आम आदमी पार्टी (आप) आनें वाले लोकसभा चुनाव में राज्य में कांग्रेस पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी।
पंजाब के सीएम ने यह दावा भी दोहराया कि ‘आप’ राज्य की सभी 13 लोकसभा सीट पर जीत दर्ज करेगी।
ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘कांग्रेस अपने दम पर 300 सीटों पर चुनाव लड़ ले। क्षेत्रीय दल एकजुट हैं और बाकी सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि, हम बंगाल में उनके (कांग्रेस) किसी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’
उन्होंने बोला कि उनकी पार्टी चुनाव होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करेगी।
ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय स्तर पर हम ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा होने के नाते चुनाव के बाद अपनी रणनीति तय करेंगे। बीजेपी को हराने के लिए जो करना होगा, हम करेंगे।’’
राहुल गांधी की प्रतिनिधित्व वाली ‘भारत जोड़ो इन्साफ यात्रा’ के बारे में उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें राज्य में यात्रा के कार्यक्रम के बारे में सूचित नहीं किया है। यह यात्रा बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल में प्रवेश करेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘शिष्टाचार के नाते, क्या उन्होंने (कांग्रेस) मुझे कहा कि वे यात्रा के लिए बंगाल आ रहे हैं? मुझे इसकी जानकारी नहीं है।’’
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और तृण मूल काँग्रेस के मुखर आलोचक माने जाने वाले अधीर रंजन चौधरी ने बोला कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी से सीटों के लिए ‘‘भीख’’ नहीं मांगेगी।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने 22 जबकि कांग्रेस पार्टी ने दो सीटे जीती थी जबकि बीजेपी को 18 सीट मिली थी।
तृणमूल कांग्रेस पार्टी हाल में ‘इंडिया’ गठबंधन की डिजिटल माध्यम से आयोजित बैठक से दूर रही थी और उसने कांग्रेस पार्टी के लिए बंगाल में अपनी सीमाओं को पहचानने की जरूरत और राज्य की सियासी लड़ाई का नेतृत्व तृण मूल काँग्रेस को करने देने की जरूरत पर बल दिया था।
पंजाब के सीएम मान ने कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करने संबंधी बयान ऐसे समय दिया है जब आप और कांग्रेस पार्टी के बीच आम चुनाव के लिए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गोवा और गुजरात में सीट बंटवारे को लेकर वार्ता चल रही है।
हालांकि, आप ने चंडीगढ़ महापौर चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन किया है। कांग्रेस पार्टी के साथ अपनी पार्टी के गठबंधन से जुड़े एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मान ने बोला कि उन्होंने कई बार बोला है कि ‘पंजाब राष्ट्र में नायक के रूप में उभरेगा और 2024 के लोकसभा चुनावों में आप सभी 13 सीट जीतेगी।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या यह साफ है कि कांग्रेस पार्टी के साथ ‘आप’ चुनावी गठबंधन नहीं करेगी। इस प्रश्न पर मान ने कहा, ‘‘हम उनके (कांग्रेस) साथ नहीं जाएंगे।’’
पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने पंजाब में आठ सीटें जीती थीं, वहीं शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी ने दो-दो तथा आप ने एक सीट पर जीत हासिल की थी।
मान और आप के कई नेता लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के साथ किसी भी समझौते का विरोध कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के लिए बीजेपी के सह-प्रभारी और पार्टी के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का ममता बनर्जी का निर्णय हताशा का संकेत है। अपनी सियासी जमीन बचाने में असमर्थ होने के कारण वह सभी सीट पर चुनाव लड़ना चाहती है ताकि चुनाव के बाद भी उनकी प्रासंगिकता बनी रहे।’’
इस बीच नयी दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सूत्रों ने बुधवार को दावा किया कि कांग्रेस पार्टी ने सीट बंटवारे पर वार्ता में देरी की और जमीनी हकीकत को समझे बिना सीट-बंटवारे पर अतर्कसंगत मांगें रखीं।
सूत्रों ने बोला कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी ‘पिछले दरवाजे से शिष्टाचार’ वार्ता करने के लिए तैयार है लेकिन कोई समझौता होने की आशा बमुश्किल ही बची है।
तृणमूल कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बोला कि पार्टी ने कांग्रेस पार्टी को पश्चिम बंगाल में दो लोकसभा सीट की पेशकश की थी और तीसरी सीट के लिए वार्ता को तैयार थी, बशर्ते कांग्रेस पार्टी मेघालय और असम में तृणमूल कांग्रेस पार्टी को कुछ सीट देने पर सहमत हो जाती। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पार्टी (राकांपा) के शरद पवार नीत खेमे ने बोला कि बनर्जी की घोषणा किसी ‘रणनीति’ का हिस्सा हो सकती है और ‘इंडिया’ गठबंधन बीजेपी के विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा है।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने बोला कि ममता बनर्जी ‘शेरनी’ की तरह लड़ रही हैं और उनके राज्य के लिए उनकी लड़ाई जरूरी है।