गायक और बीजेपी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे बाबुल सुप्रियो ने पॉलिटिक्स से संन्यास लेने का निर्णय कर लिया है. फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर करके उन्होंने बोला कि अब समाजसेवा की तरफ ध्यान केंद्रित करना चाहता हूं और यह कार्य पॉलिटिक्स के बिना भी किया जा सकता है. वैसे तो कुछ समय से उनके बारे में इस तरह की चर्चा चल रही थी लेकिन किसी को नहीं पता था कि वह इतनी शीघ्र पॉलिटिक्स छोड़ने का निर्णय ले लेंगे. बता दें कि मोदी कैबिनेट के विस्तार के बाद भी उन्होंने फेसबुक पर निराशा जताई थी. उन्होंने बोला था कि जो लोग बंगाले से मंत्रिमंडल मे शामिल हो रहे हैं, उनके लिए खुश हूं लेकिन अपने लिए दुखी भी हूं.
फेसबुक पर लंबी-चौड़ी पोस्ट शेयर करते हुए बाबुल सुप्रियो ने लिखा, ‘सब की बातें सुनी। । बाप, (माँ) पत्नी, बेटी, दो प्यारे दोस्त। । इसके बाद कहता हूँ मैं किसी और पार्टी में नहीं जा रहा। । न काग्रेस, न टीएमसी न सीपीआई. मैं एक टीम का खिलाड़ी हूँ! हमेशा एक टीम का समर्थन किया है.’ ‘अलविदा’ शब्द के साथ प्रारम्भ हुई पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘ सामाजिक काम करना है तो बिना पॉलिटिक्स के भी कर सकते हैं.’
कि उनके प्यार को कभी नहीं भूलूंगा. उन्होंने यह भी बोला कि वे सोच सकते हैं कि मैं सियासी सौदेबाजी करना चाहता हूं. लेकिन ऐसा नहीं है. यदि वे मुझे गलत समझ रहे हैं तो माफ कर दें.
सुप्रियो ने आसनसोल की जनता से भी माफी मांगी और बोला कि मुझे अफसोस है कि आपसे दूर जाना पड़ रहा है. साथ ही उन्होंने बोला कि एक महीने के भीतर वह अपना दिल्ली का मकान छोड़ देंगे जिससे दूसरे सांसद को मिल सके. अंत में उन्होंने यह भी लिखा कि 1992 में उन्होंने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की जॉब छोड़ी थी और मुंबई चले गए थे. पूरी पोस्ट पढ़ने के बाद इतना तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह इसे लिखते समय भावुक थे.
वह पहले भी ऐसी पोस्ट शेयर कर चुके हैं जिसमें उन्होंने पॉलिटिक्स से निराशा की बात की थी. पश्चिम बंगाल में इन दिनों कई बड़े नेता भी उनकी आलोचना करते नजर आ रहे थे.