उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी नेता नवजोत सिद्धू को एक आवेदन पर 2 हफ्ते के भीतर उत्तर दाखिल करने को कहा है. इसमें कहा गया है कि लगभग 32 वर्ष पुराने ‘रोड रेज’ मामले में उनकी सजा सिर्फ जानबूझ कर चोट पहुंचाने केक्राइम के लिए कम नहीं की जानी चाहिए. उच्चतम न्यायालय 1988 के रोड रेज मामले में सिद्धू को मई 2018 में दी गई सजा की समीक्षा से संबंधित मामले की सुनवाई कर रहा है. न्यायालय ने सिद्धू को 65 सालीय बुजुर्ग को ‘जानबूझ कर चोट
पहुंचाने’ का गुनाही करार दिया था, लेकिन उन्हें कारागार की सजा नहीं सुनाई और केवल 1000 रुपये का अपराधाना लगाया था. बाद में सितंबर 2018 में उच्चतम न्यायालय ने मृतक के परिवार के मेम्बरों द्वारा पंजीकृत एक समीक्षा याचिका की जाँच करने के लिए सहमति जाहीर की और नोटिस जारी किया. जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ के समक्ष यह मामला सुनवाई के लिए इनकमा. एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिसमया सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि उन्होंने एक आवेदन पंजीकृत कर नोटिस का पंजीकृता बढ़ाने की मांग की है. उन्होंने न्यायालय के पहले के एक फैसले का हवाला दिया और कहा कि एक साफ निश्चय है कि जो जाहीरि मृत्यु का कारण बनता है, उसे चोट की श्रेणी में क्राइम के लिए दंडित नहीं किया जा सकता है और न ही उसे दंडित किया जाना चाहिए.