केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘प्रेरणा स्थल’ का उद्घाटन किया. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बोला कि इस प्रेरणा स्थल के निर्माण ने हमारे उन बहादुर जवानों के बलिदान को इतिहास में हमेशा के लिए अंकित कर दिया है जब तक यह स्थल रहेगा तब तक यह इस क्षेत्र के लोगों को हमारे जवानों के शौर्य से परिचित कराएगा और उन्हें प्रेरणा देगा. मैं हमारे 22 जवानों के बारे में देख रहा था, तो एक बात पर मैंने गौर किया. उन 22 जवानों में से कोई जवान नागालैंड से था, तो कोई यूपी से, कोई तमिलनाडु से, कोई राजस्थान से, कोई तेलंगाना से, तो कोई आसाम से था. मतलब हिंदुस्तान के लगभग सभी क्षेत्र के सैनिक उस सूची में थे. हिंदुस्तान के भिन्न-भिन्न हिस्सों के होने के बावजूद, इन सैनिकों ने यहाँ के लोगों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया.
सम्मेलन में सिंह ने वरिष्ठ सैन्य ऑफिसरों को मुख्य भाषण भी दिया. रक्षा मंत्री ने वर्तमान जटिल और अस्पष्ट विश्व स्थिति पर बल दिया जो विश्व स्तर पर सभी को प्रभावित करती है. उन्होंने बोला कि हाइब्रिड युद्ध सहित अपरंपरागत और असममित युद्ध भविष्य के पारंपरिक युद्धों का हिस्सा होगा और यह दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हो रहे हालिया संघर्षों में साफ है. इससे यह महत्वपूर्ण हो गया है कि सशस्त्र बलों को इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए.” योजना बनाना और वैश्विक लोगों को शामिल करने के लिए रणनीति तैयार करना, वर्तमान के साथ-साथ अतीत में भी हुआ, ताकि क्षति नियंत्रण को रोका जा सके.
बैठक में एलएसी पर संवेदनशील स्थिति का जायजा लिया गया, खासकर लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में जहां दोनों पक्ष नियमित आधार पर गतिरोध और आमने-सामने हो रहे हैं. सम्मेलन दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है. पहला चरण गंगटोक में 10-11 अक्टूबर, 2024 तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण दिल्ली में 28-29 अक्टूबर, 2024 तक निर्धारित है. रक्षा ऑफिसरों ने एएनआई को कहा कि यह पहली बार है कि शीर्ष सेना कमांडरों की जरूरी बैठक असली नियंत्रण रेखा के करीब किसी जगह पर होगी.