राहुल गांधी की हिंदुस्तान जोड़ो यात्रा के दौरान अपने राजनीतिक बयानों पर लगाम लगाने वाले सचिन पायलट अब एक बार फिर एक्शन में हैं. एक दिन पहले हाथ से हाथ जोड़ो अभियान में शामिल नहीं होने वाले पायलट अब किसान सम्मेलन करने जा रहे हैं. वे सीधा लोगों से सम्पर्क बढ़ाने जा रहे हैं. इसके लिए पायलट समर्थक मंत्री और विधायक तैयारियों में जुट गए हैं.
प्रदेश में सभाएं करेंगे पायलट
पायलट 16 जनवरी को नागौर जिले के परतबसर में किसान सम्मेलन से शक्ति प्रदर्शन की आरंभ कर रहे है. इसके बाद 18 जनवरी को झुंझुनूं जिले के गुढ़ा क्षेत्र में पायलट की सभा रखी गई है. इसके बाद मारवाड़ और नहरी क्षेत्र में भी पायलट की सभाओं और किसान सभाओं के कार्यक्रम बन रहे हैं. पायलट समर्थक नेताओं ने प्रदेश भर में तैयारियां प्रारम्भ कर दी हैं. सीएम अशोक गहलोत के क्षेत्र में उनकी सभाएं रखी जाएगी. विधानसभा के बजट सत्र के बीच पड़ने वाली छुट्टियों में भी पायलट की सभाएं तय की जा रही हैं.
मांगें नही हुई पूरी
सचिन पायलट चुनाव से पहले फील्ड में उतरकर हाईकमान को अपना जनाधार दिखाना चाहते हैं. इसी रणनीति के अनुसार उनकी सभाओं के प्रोग्राम बनाए जा रहे हैं. इस प्रकार की रैलियों से पायलट विरोधी खेमे को अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं.
गहलोत खेमे से दूरियां बरकरार
राहुल गांधी की हिंदुस्तान जोड़ो यात्रा पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को गद्दार बोल दिया था. उनको बिना जनाधार वाला नेता बताया था. सूत्रों की माने तो यह सब रैलियां उसी रणनीति का हिस्सा हैं. उस बयान के बाद संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दोनो नेताओं के बीच समझौता करवाया था. ताकि राहुल गांधी की हिंदुस्तान जोड़ो यात्रा के दौरान पार्टी में एकजुटता दिखे.
हाईकमान पर रहेंगी सबकी नजरें
सचिन पायलट समर्थकों ने अंदरखाने पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की मांग फिर से उठाना प्रारम्भ कर दिया है. उधर गहलोत खेमा इस मांग को मानने को तैयार नहीं है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बजट पेश करने की तैयारी कर रहे हैं, गहलोत इशारों में कई बार यह जता चुके हैं कि स्थान खाली नहीं करेंगे. अब इस पूरे मुद्दे को लेकर एक बार फिर सभी की नजरें हाईकमान पर हैं.