जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में रविवार को ग्रामीणों ने भारी हथियारों से लैस लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के दो आतंकियों को काबू कर पुलिस को सौंप दिया. उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने ग्रामीणों के साहस की प्रशंसा की और उनके लिए नकद पुरस्कार की घोषणा की. ऑफिसरों ने बोला कि घटना तुकसन ढोक गांव में हुई और पकड़े गए आतंकियों में राजौरी जिले का निवासी लश्कर कमांडर तालिब हुसैन शामिल है जो जिले में पिछले दिनों हुए आईईडी विस्फोटों का मास्टरमाइंड भी था. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, जम्मू जोन मुकेश सिंह ने यहां एक बयान में कहा, ‘ग्रामीणों ने लश्कर के दो ‘मोस्ट वांटेड’ आतंकियों को पकड़ने में अत्यधिक साहस दिखाया, जो पुलिस और सेना (राजौरी जिले में) के लगातार दबाव के बाद क्षेत्र में शरण लेने के लिए पहुंचे थे.’ उन्होंने अन्य पकड़े गए आतंकी की पहचान दक्षिण कश्मीर के पुलवामा के फैजल अहमद डार के रूप में की और बोला कि अरैस्ट आतंकियों के पास से दो एके राइफल, सात ग्रेनेड, एक पिस्तौल और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया. प्रारंभिक पूछताछ के दौरान यह पता चला है कि दोनों आतंकी पाकिस्तानी लश्कर के आतंकवादी सलमान के संपर्क में भी थे. दोनों आतंकियों की गिरफ्तारी को एक बड़ी कामयाबी बताते हुए अधिकारी ने बोला कि वे रियासी के अतिरिक्त सीमावर्ती जिलों राजौरी और पुंछ में फिर से आतंकवाद फैलाने का कोशिश कर रहे थे.
पुलिस अधिकारी ने बोला कि उपराज्यपाल ने ग्रामीणों के साहस की सराहना की और उनकी बहादुरी के लिए 5 लाख रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की, जबकि पुलिस महानिदेशक ने उनके लिए दो लाख रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की. उपराज्यपाल कार्यालय ने ट्वीट किया, ‘मैं तुकसन ढोक, रियासी के ग्रामीणों की बहादुरी को सलाम करता हूं, जिन्होंने दो ‘मोस्ट वांटेड’ आतंकियों को पकड़ा. आम आदमी का ऐसा दृढ़ संकल्प दिखाता है कि आतंकवाद का अंत दूर नहीं है. आतंकियों और आतंकवाद के विरूद्ध वीरतापूर्ण कार्य के लिए केंद्रशासित प्रदेश गवर्नमेंट ग्रामीणों को पांच लाख रुपये का नकद पुरस्कार देगी.’