नई दिल्ली: दिल्ली सेवा बिल को राज्यसभा में सोमवार को पेश किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बिल को पेश करेंगे। उल्लेखनीय है कि लोकसभा में ये बिल पहले ही पारित हो चुका है। लोकसभा में इसे 3 अगस्त को पारित किया गया था। विधेयक पर चाढ़े चार घंटे की चर्चा चली थी, जिसका उत्तर देते हुए गृह मंत्री ने विपक्ष पर कई प्रश्न खड़े किए थे।
दिल्ली सेवा बिल में क्या है?
इस बिल में दिल्ली गवर्नमेंट अधिनियम में संशोधन किया गया है और ऑफिसरों की नियुक्ति और ट्रांसफर का निर्णय लेने के लिए प्राधिकरण बनाने की बात कही गई है। इस प्राधिकरण में दिल्ली के सीएम को शामिल तो किया जाएगा लेकिन निर्णय लेने का अंतिम अधिकार उपराज्यपाल को है।
केंद्र गवर्नमेंट और AAP के बीच टकराव
इस बिल की वजह से केंद्र गवर्नमेंट और आम आदमी पार्टी के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है। आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल इस बिल का विरोध कर रहे हैं और विपक्षी दलों के पास जाकर इस बिल के विरोध के लिए किरदार बना रहे हैं। केजरीवाल की प्रयास है कि ये बिल राज्यसभा में पारित ना हो लेकिन राज्यसभा में सब कुछ सदस्यों की संख्या पर निर्भर करता है।
राज्यसभा में AAP के लिए काफी कठिन इसलिए भी है क्योंकि मायावती की BSP ने लोकसभा और राज्यसभा में वोटिंग के दौरान बायकॉट का घोषणा किया था। वहीं ओडिशा की सत्ताधारी BJD, TDP और YSR केंद्र के समर्थन में हैं।
ये है नंबर का गणित
- राज्यसभा में कुल सांसद- 238
- बहुमत के लिए महत्वपूर्ण सांसद- 119
- बीजेपी के पास राज्यसभा में सांसद- 92
- बीजेपी के पास सहयोगी दलों को मिलाकर सांसद- 103
- बीजेपी को निर्दलीयों का समर्थन- 2
- मायावती की पार्टी बीएसपी ने किया बॉयकॉट, उनका राज्यसभा में सांसद- 1
- दिल्ली सेवा बिल पर YSR, BJD और TDP ने किया केंद्र का समर्थन-3
- बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा में सांसद- 9-9
- टीडीपी का सांसद- 1
- विपक्षी दलों के गठबंधन ‘INDIA’ के पास कुल सांसद- 109