दरअसल, सम्मेद शिखर को लेकर जैन समाज पिछले कई दिनों से सड़कों पर है. पिछले कई दिनों से राष्ट्र के कई शहरों में लगातार प्रदर्शन हो रहा है. हाल ही में सूरत में जैन समाज ने विशाल रैली निकाली थी. सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने के निर्णय से जैन समाज काफी नाराज चल रहा था. इसी बीच केंद्र गवर्नमेंट ने कमेटी बनाते हुए बोला है कि राज्य गवर्नमेंट समिति में जैन समुदाय से 2 सदस्यों को शामिल करे. वहीं, एक सदस्य क्षेत्रीय जनजातीय समुदाय से शामिल किया जाए.
केंद्र ने राज्य को 2019 की अधिसूचना के खंड 3 के प्रावधानों पर रोक लगाने के आदेश भी दिए हैं. यह निर्णय केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की जैन समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात के बाद आया है. केंद्रीय मंत्री ने मीटिंग में जैन समाज के लोगों को भरोसा दिया था कि मोदी गवर्नमेंट सम्मेद शिखर की पवित्रता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.
दरअसल पर्यावरण, वन और जलवायु बदलाव मंत्रालय को पिछले कई दिनों में पारसनाथ वन्यजीव अभयारण्य में होने वाले पर्यटन के मामले पर जैन समाज के कई संगठनों से आवदेन मिल रहे थे. इनमें बोला जा रहा था कि सम्मेद शिखर में पर्यटन गतिविधियों के कारण जैन धर्म के अनुयायियों की भावनाओं पर बुरा असर पड़ रहा है.