आखिर क्यों नरेंद्र मोदी स्टेडियम ही अब हर छोटे-बड़े मुकाबलों के लिए पहली पसंद बन गया है. दर्शकों की संख्या के आधार पर नरेंद्र मोदी स्टेडियम दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम जिसमें 132000 दर्शक बैठ सकते हैं.
मुंबई के वानखड़े स्टेडियम पर 12 वर्ष पहले की हिंदुस्तान की जीत की फोटोज़ श्रीलंका को उसके फाइनल फ्रंटियर पर पस्त होने की याद दिलाती हैं तो हिंदुस्तान और वर्ल्ड क्रिकेट को शायद एक ऐतिहासिक जीत की. अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम एकदिवसीय विश्व कप के 4 रोमांचक खेलों का आयोजन करने के लिए तैयार है, जिसमें टूर्नामेंट का पहला मैच हिंदुस्तान बनाम पाकिस्तान, इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया और 5 से 19 नवंबर तक होने वाला फाइनल शामिल है. लेकिन क्रिकेट के सबसे बड़े टूर्नामेंट के आयोजन से पहले ही सियासी घमासान प्रारम्भ हो गया है. आयोजन स्थलों के चयन को लेकर टकराव चर्चा का विषय बना हुआ है. कई नेताओं का मानना है कि स्थानों का चयन भारतीय क्रिकेट बोर्ड और राजनीति के बीच शक्ति की गतिशीलता को दर्शाता है. राजनेताओं ने अहमदाबाद को बड़े खेल खेल आयोजन की मेजबानी पर प्रश्न उठाए, जबकि उनके गृह राज्य से किनारा करने को लेकर अपनी चिंता जाहिर की.
अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में सारे बड़े मुकाबले
इसी वर्ष अक्टूबर-नवंबर को टीम इण्डिया अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम पर एक और इतिहास रचने की तैयारी में है. दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम में सबसे अधिक 1 लाख 32 हजार दर्शक एक साथ क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 की ओपनिंग और फाइनल का लुप्त उठा सकेंगे और 15 अक्टूबर को हिंदुस्तान और पाक के बीच होने वाले मैच का तो क्रिकेट की दुनिया बेताबी से इन्तजार कर रही है. अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम क्रिकेट के मानचित्र पर तेजी से अपनी पहचान बना रहा है. हिंदुस्तान में होने वाले लगभग हर बड़े मुकाबले इसी मैदान पर खेले जाते हैं. 5 अक्टूबर से वर्ल्ड कप की आरंभ इसी ग्राउंड से हो रही है. ओपनिंग के अतिरिक्त फाइनल मैच और हिंदुस्तान पाक के बीच कांटे की भिड़न्त भी यहीं दिखेगी. यहां तक की आईपीएल के फाइनल भी यहीं होते हैं.
वर्ल्ड कप 2023 के शेड्यूल से शशि थरूर खफा
कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य शशि थरूर ने विश्व कप के किसी मुकाबले का आयोजन उनके शहर में नहीं होने पर विरोध जताई. उन्होंने ट्वीट करते हुए बोला कि यह देखकर निराशा हुई कि तिरुवनंतपुरम विश्वकप की कार्यक्रम सूची में नहीं है, जबकि बहुत सारे लोग इसके क्रिकेट स्टेडियम के सर्वश्रेष्ठ स्टेडियम के रूप में सराहते हैं. अहमदाबाद राष्ट्र में क्रिकेट की राजधानी बन रहा है, लेकिन केरल के हिस्से में कोई मैच नहीं आया है. क्या एक या दो मैच केरल को आवंटित नहीं किए जा सकते थे? ट्वीट में अहमदाबाद का जिक्र कर थरूर ने भारतीय क्रिकेट में भाजपा के बढ़ते असर की ओर इशारा किया है. गुजरात और केंद्र गवर्नमेंट से लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई तक में भाजपा नेता या उससे जुड़े लोग फैसला लेने वाले पजों पर हैं.
मोहाली में विश्व कप का एक भी मैच नहीं
पंजाब के खेल मंत्री गुरमीत सिंह मीत हायर ने विश्वकप मुकाबले की मेजबानी करने वाले शहरों में मोहाली को शामिल नहीं किए जाने की निंदा की. उन्होंने दावा किया कि मेजबान शहरों का चयन राजनीति कारणों से प्रेरित है. हायर के मुताबिक, राज्य गवर्नमेंट ‘भेदभाव’ के इस मामले को उचित स्तर पर उठाएगी. उनका बोलना है कि मोहाली क्रिकेट स्टेडियम 1996 और 2011 के विश्व कप के कुछ प्रमुख मुकाबलों का गवाह रहा है, लेकिन इस बार इसे एक भी मैच की मेजबानी का मौका नहीं दिया गया. पंजाब के मंत्री ने सियासी हस्तक्षेप का आरोप लगाया और तंज कसते हुए बोला कि सब जानते हैं कि बीसीसीआई की प्रतिनिधित्व कौन कर रहा है. पंजाब के साथ हुए इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने बोला कि सीएम भगवंत मान के नेतृत्व वाली राज्य गवर्नमेंट यह भेदभाव का मामला बीसीसीआई के समक्ष उठाएगी.
पाकिस्तान की आपत्तियां
पाकिस्तान आरंभ से ही न तो अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मैच खेलने के लिए तैयार था. उसने अफगानिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध होने वाले मैचों का भी वेन्यू बदलने की मांग की थी. इसके पीछे उसने बेंगलुरू और चेन्नई की पिच को एक बड़ी वजह बताया था. पाक मुंबई में वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल मैच भी खेलने के लिए तैयार नहीं है. इसके पीछे उसने सुरक्षा कारण और राजनीति को प्रमुख वजह बताया. लेकिन अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेलने से मना करने के पीछे पाक के पास शायद एक ही वजह है और वो है इस स्टेडियम का नाम. वो नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेलने से न जाने क्यों कतरा रहे हैं.
क्रिकेट और पॉलिटिकल पॉवर गेम
जैसा कि हम जानते हैं कि क्रिकेट में सत्ता का खेल कैसे चलता है. 2011 के पुराने दिनों में शरद पवार का क्रिकेट की दुनिया में बोलबाला था. वानखड़े स्टेडियम में सभी जरूरी मुकाबले खेले जाते थे. विश्व कप 2011 का फाइनल मैच भी यहीं आयोजित हुआ था. यदि हम 90 के दशक पर नजर डाले तो जगमोहन डालमिया के दौर में कोलकाता के ईडन गार्डेन क्रिकेट का पावर सेंटर हुआ करता था. 2019 में जय शाह के बीसीसीआई के सेक्रेटरी बनने के बाद अहमदाबाद क्रिकेट का नया पावर सेंटर बनता नजर आया. आईपीएल के फाइनल समेत बड़े मुकाबले की मेजबानी इसे मिलने लगी.
क्या इस स्टेडियम को बनाता है खास
ये तो हो गई राजनीति और पावर सेंटर की बात अब थोड़ा फैक्ट को समझते हैं कि आखिर क्यों नरेंद्र मोदी स्टेडियम ही अब हर छोटे-बड़े मुकाबलों के लिए पहली पसंद बन गया है. दर्शकों की संख्या के आधार पर नरेंद्र मोदी स्टेडियम दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम जिसमें 132000 दर्शक बैठ सकते हैं जो मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड से 32 हजार अधिक है. मोटेरा स्टेडियम को ही रिनोवेट कर उसका नया नाम हिंदुस्तान के पीएम के नाम पर रखा गया है. यहां 11 भिन्न-भिन्न क्रिकेट पिच है, जिसे तीन तरह की मिट्टी (काली, लाल और दोनों का मिश्रण) के उपयोग से तैयार किया गया है. इसके अतिरिक्त वर्ल्ड क्लास ड्रेसिंग रूम, जिम, रेस्टोरेंट इसे राष्ट्र के दूसरे मैदानों से अलग बनाता है.
मैच से पहले नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होने जा रहे हे ये खास बदलाव
आउटफिल्ड को किया जाएगा अपग्रेड: आईसीसी के दिशा-निर्देशों के मुताबिक आउटफील्ड 85 गज की होगी. ये ऑपरेशन एक फ्रेंश टच देगा.
मीडिया कक्ष में बैठने की क्षमता बढ़ाए जाएगी: वर्ल्ड कप के मैच के लिए पूरे विश्व के पत्रकार आएंगे. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक स्टेडियम की मौजूदा मीडिया बैठने की प्रबंध को भी बढ़ाया जाएगा. वर्तमान में 100 पत्रकार मैच को कवर कर सकते हैं, जिसे आगे बढ़ाकर 200 तक किया जा सकता है.
प्रसारण सुविधा में भी अपग्रेडेशन: आईसीसी टीम अगले महीने यानी जुलाई के मध्य में अहमदाबाद का दौरा करेगी. उनके सुझाव के आधार पर भी परिवर्तन होंगे. कमेंट्री का एरिया भी नए सिरे से तैयार किया जाएगा.