Lok Sabha Election Result: लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल में भाजपा की प्रचंड बहुमत वाली गवर्नमेंट बनने की बात कही है। एग्जिट पोल में बोला गया है कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी तीसरी बार राष्ट्र के पीएम बनने जा रहे हैं और भाजपा इस बार 400 पार करने जा रही है। हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि पड़ोसी राष्ट्र चीन में भी लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर चर्चा हो रही है। खासकर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरी बार पीएम बनने की खबरों का चीन में भी असर दिखाई दे रहा है। साथ ही चीन प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की जीत को सकारात्मक ढंग से ले रहा है।
‘पीएम मोदी के दोबारा सत्ता में आने पर मधुर होंगे संबंध’
दरअसल, चीन के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरी बार पीएम बनने पर दोनों राष्ट्रों के संबंध मधुर होने की बात कही है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि नरेंद्र मोदी के दोबारा पीएम बनने पर भारत-चीन की दोस्ती की आसार है। बता दें कि ग्लोबल टाइम्स शी जिनपिंग की गवर्नमेंट का आधिकारिक समाचार पत्र है। इसीलिए ग्लोबल टाइम्स के विचारों को चीन का विचार माना जाता है। ऐसे में एक्सपर्ट्स के हवाले से लिखे गए ग्लोबल टाइम्स के इस लेख को काफी अहम बताया जा रहा है।
ग्लोबल टाइम्स ने क्या लिखा?
चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने हाल ही में लिखे अपने आर्टिकल में बोला है कि पीएम मोदी के सत्ता में फिर से आने से हिंदुस्तान और चीन के बीच संबंध भी सुधरेंगे। चीनी ए्क्सपर्ट्स के हवाले से ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि, नरेंद्र मोदी के तीसरी बार पीएम बनने से हिंदुस्तान की विदेश नीति और कूटनीति और अधिक मजबूत होगी। वहीं एग्जिट पोल को लेकर विश्लेषकों का मानना है कि नरेंद्र मोदी की जीत से हिंदुस्तान की समग्र घरेलू और विदेश नीतियां जारी रहेंगी। साथ ही प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी से हिंदुस्तान की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों को जारी रखने की आशा है। उल्लेखनीय है कि ग्लोबल टाइम्स में चीनी गवर्नमेंट की बिना मर्जी के कुछ नहीं लिखा जाता है। इसीलिए इसे चीनी गवर्नमेंट की राय और बयान बताया जा रहा है।
पीएम मोदी की जीत की आसार पर क्या कहे चीनी एक्सपर्ट्स
वहीं सिंघुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रेटजी इंस्टीट्यूट में रिसर्च डिपार्टमेंट के डायरेक्टर कियान फेंग ने रविवार को चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स से वार्ता के दौरान बोला कि नरेंद्र मोदी हिंदुस्तान के लिए निर्धारित घरेलू और विदेश नीति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते रहेंगे, जिसमें उनका मुख्य ध्यान कुछ वर्षों के भीतर अमेरिका और चीन के बाद हिंदुस्तान को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने पर रहेगा। इसके साथ ही हिंदुस्तान को एक अग्रणी शक्ति बनाने के पीएम के दृष्टिकोण पर उनका मानना है कि नरेंद्र मोदी कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से हिंदुस्तान के अंतरराष्ट्रीय असर को लगातार बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
भारत और चीन के बीच होगी दोस्ती?
भारत और चीन के संबंधों को लेकर चीनी जानकारों का बोलना है कि यदि नरेंद्र मोदी फिर से पीएम बनते हैं तो चीन और हिंदुस्तान के बीच इस बार विवाद बढ़ने की आसार नहीं है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में जून के महीने में गलवान घाटी में हिंदुस्तान और चीनी सैनिकों के बीच खूनी झड़प हो गई थी। जिसमें दोनों और के कई सैनिक मारे गए थे। इस झड़प के बाद दोनों राष्ट्रों के बीच विवाद बढ़ गया है। फुडान यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज के डिप्टी डायरेक्टर लिन मिनवांग ने ग्लोबल टाइम्स से बोला कि, ‘चीन और जापान-ऑस्ट्रेलिया जैसे अमेरिकी सहयोगियों समेत कई राष्ट्रों के बीच संबंध अब सुधर रहे हैं। इसलिए हिंदुस्तान यह प्रश्न उठा सकता है कि चीन-भारत संबंधों में अब तक कोई सुधार या सहजता क्यों नहीं दिख रही है।“
पीएम मोदी के साक्षात्कार को किया याद
ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा, ‘अमेरिकी मैग्जीन न्यूजवीक को अप्रैल महीने में दिए एक साक्षात्कार में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने बोला था कि हिंदुस्तान के लिए चीन के साथ संबंध अहम और सिग्निफिकेंट हैं। उन्होंने बोला था कि हिंदुस्तान और चीन को अपनी सीमाओं पर लंबे समय से चली आ रही विवाद की स्थिति को तुरन्त हल करने की महत्वपूर्ण है। जिससे हमारे द्विपक्षीय संबंधों में खटास को पीछे छोड़ा जा सके। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह भी बोला था कि हिंदुस्तान और चीन के बीच स्थिर और शांतिपूर्ण संबंध न सिर्फ़ दोनों राष्ट्रों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र और दुनिया के लिए जरूरी हैं।‘
क्या भारत-चीन संबंधों में होगा सुधार?
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, चीन हिंदुस्तान के साथ संबंधों को एक्टिव रूप से बेहतर करने के लिए प्रतिबद्ध है। चीनी पक्ष का मानना है कि स्थिर द्विपक्षीय संबंध बनाए रखना दोनों पक्षों के भलाई में है। विश्लेषकों का बोलना है कि यदि हिंदुस्तान प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के अगले कार्यकाल में चीन के साथ मिलकर काम कर सकता है, तो इससे दोनों राष्ट्रों के बीच संबंधों में सुधार का रास्ता साफ हो सकता है। “