कारगिल विजय दिवस पर भारतीय थल सेना के पूर्व प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने बोला कि ‘पाकिस्तान हो या चीन, ये कितनी भी मित्रता दिखाएं, हमें (भारतीय सशस्त्र बलों को) को हर समय अलर्ट रहना होगा. कारगिल युद्ध ने यही सिखाया है. कारगिल विजय दिवस कार्यक्रम पर इंडियन आर्मी दो दिवसीय कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए पूर्व थलसेना अध्यक्ष वीपी मलिक ने आगे बोला कि ‘हमारे राष्ट्र की सेना अब पहले से सशक्त हो गई है. कारगिल की सीमा पर बहुत विकास हुआ है.
जनरल वीपी मलिक ने आगे बोला कि कारगिल का युद्ध सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में सख्त मौसम की स्थिति में लड़ा गया था. इसके बावजूद द्रास, कारगिल और बटालिक सेक्टरों में शत्रु की हार हुई. इंडियन आर्मी ने युद्ध में टोलोलिंग, टाइगर हिल और प्वाइंट 4875 सहित अन्य रणनीतिक चोटियों पर फिर से कब्जा कर लिया. उन्होंने कहा कि आज कारगिल के आसपास सभी स्थान रोड बन गई हैं. सेना को पहुंचने में अधिक समय नहीं लगेगा. जनरल वीपी मलिक ने अपने सैनिकों की वीरगति को याद किया.
कारगिल मेरे लिए अविस्मरणीय: वीपी मलिक
उन्होंने बोला कि यह स्थान मेरे लिए अविस्मरणीय है. मुझे सशस्त्र बलों विशेषकर इंडियन आर्मी पर गर्व महसूस होता है जिसका मैं उस समय नेतृत्व कर रहा था. जिस तरह से उन्होंने सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जमीन पर कब्जा कर लिया, उसने हमारी सेनाओं की असली प्रकृति को दिखाया. मैं उन लोगों के परिजनों के बीच बहुत सम्मानित महसूस करता हूं जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया. पूर्व थल सेनाध्यक्ष वीपी मलिक ने बोला कि 24 वर्ष में हमारे राष्ट्र की सेना आत्मनिर्भर बनी है. जवानों के वार्ता के साधन भी हाईटेक हो गए हैं. सीमा तक सेना को पहुंचने में अधिक समय भी नहीं लगेगा.
विषम परिस्थितियों में लड़ा गया था कारगिल युद्ध
युद्ध के दौरान दो परमवीर चक्र पाने वाली बटालियन का नेतृत्व करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल (तत्कालीन लेफ्टिनेंट कर्नल) वाईके जोशी (रिटा।) भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए. ले। जनरल जोशी ने कारगिल में 13 जम्मू कश्मीर राइफल्स को लीड किया था. वो बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर थे. ले। जनरल वाईके जोशी की बटालियन से कैप्टन विक्रम बत्रा को मरणोपरांत और राइफलमैन (अब सूबेदार) संजय कुमार (रिटा।) को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था. जनरल जोशी को उनके असाधारण नेतृ्व के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया था. लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने बोला कि हमने यह युद्ध काफी कठिन समय में लड़ा.
जंग के दौरान शून्य से भी नीचे था कारगिल का तापमान
उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्र बहुत चुनौतीपूर्ण था, तापमान शून्य से नीचे था और ऑक्सीजन की कमी थी. इसके साथ ही गोला-बारूद के पैक के साथ ऐसी चढ़ाई करना और भी मुश्किल था. शत्रु को पहाड़ की चोटी पर होने का भी लाभ था, लेकिन हमने धावा किया और उन सभी चोटियों पर फिर से कब्जा किया.