Sri Lanka Economic Crisis: श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने मंगलवार को लोगों से साथी नागरिकों के विरूद्ध “हिंसा और बदले की कार्रवाई” बंद करने का आग्रह किया और देश के सामने आने वाले सियासी और आर्थिक संकट को दूर करने का संकल्प व्यक्त किया। इससे पहले राष्ट्रपति के बड़ी भाई और पूर्व पीएम महिंदा राजपक्षे को नौसेना के अड्डे पर भेज दिया गया। उनके समर्थकों पर एक के बाद एक हो रहे हमलों के बाद उनकी सुरक्षा के मद्देनजर यह कदम उठाया गया।
देश में हिंसा में कम से कम आठ लोगों की जान अब तक जा चुकी है। कोलंबो और राष्ट्र के अन्य हिस्सों में करीब 250 लोग हिंसा में घायल भी हुए हैं। सबसे खराब आर्थिक संकट पर लोगों के बढ़ते गुस्से के बीच सत्तारूढ़ राजपक्षे परिवार के पैतृक घर को भीड़ द्वारा जलाए जाने के बाद पूरे द्वीपीय देश में कर्फ्यू लागू है। हालांकि महिंदा राजपक्षे ने पीएम पद छोड़ दिया है, लेकिन इसके बावजूद गवर्नमेंट विरोधी प्रदर्शनकारी शांत नहीं हुए और वे राष्ट्रपति गोटबाया का भी इस्तीफा मांग रहे हैं।
आइये जानते हैं श्रीलंका संकट को लेकर 10 बड़ी बातें-
1-राष्ट्रपति राजपक्षे ने हिंसा भड़कने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा, ‘‘मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे शांत रहें और हिंसा को रोकें, चाहे उनका सियासी जुड़ाव कोई भी हो। संवैधानिक जनादेश के भीतर आम सहमति के माध्यम से सियासी स्थिरता बहाल करने और आर्थिक संकट को दूर करने के लिए सभी कोशिश किए जाएंगे।’’ हिंसा के दौरान कई पूर्व मंत्रियों व नेताओं के घरों को आग लगा दी गई थी।
2-इसके कुछ घंटों बाद रक्षा मंत्रालय ने थल सेना, वायुसेना और नौसेना कर्मियों को सार्वजनिक संपत्ति को लूटने या आम लोगों को चोट पहुंचाने वाले किसी भी दंगाई को गोली मारने का आदेश दिया। राष्ट्र में हिंसा के बीच चीन ने मंगलवार को बोला कि वह श्रीलंका में घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है। चीन ने द्वीपीय देश में खासा निवेश किया है और उसने वहां काम कर रहे अपने नागरिकों को सावधान रहने और जोखिमों से बचने के लिए बोला है।
3-बीजिंग ने श्रीलंका में तेजी से हो रही घटनाओं को देखते हुए, पीएम महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है, जिन्होंने अपने गृहनगर हंबनटोटा के बंदरगाह सहित बड़े पैमाने पर चीनी निवेश का मार्ग प्रशस्त किया था। चीन ने एक कर्ज के बदले हंबनटोटा बंदरगाह को 99 वर्ष के लिये पट्टे पर ले लिये था।
4-देश में आर्थिक संकट के बीच सोमवार को महिंदा राजपक्षे (76) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस घटनाक्रम से कुछ घंटे पहले महिंदा राजपक्षे के समर्थकों द्वारा राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के कार्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों पर हमला करने के बाद राजधानी कोलंबो में सेना के जवानों को तैनात किया गया था और राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू लगा दिया गया था। हमले के बाद राजपक्षे समर्थक नेताओं के विरूद्ध बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क गई थी।
5-महिंदा ने अपनी पत्नी व परिवार के साथ आधिकारिक निवास-टेंपल ट्रीज- छोड़ दिया और श्रीलंका के पूर्वोत्तर तट पर स्थित बंदरगाह शहर ट्रिंकोमाली के नौसैनिक अड्डे पर शरण ली है। ‘टेंपल ट्रीज’ में घुसने की प्रयास कर रही भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने सोमवार की रात आंसू गैस के गोले छोड़े।
6- मंगलवार सुबह महिंदा और उनके परिवार को आधिकारिक आवास से निकालने के दौरान भीड़ को पीछे रखने के लिये पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े तथा चेतावनी के तौर पर हवा में गोलियां चलानी पड़ीं। महिंदा राजपक्षे और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के वहां पहुंचने की खबरों के बाद त्रिंकोमाली नौसैनिक अड्डे के सामने विरोध प्रदर्शन प्रारम्भ हो गया है।
7- सोमवार को, प्रदर्शनकारियों ने हंबनटोटा में राजपक्षे के पैतृक घर, 14 पूर्व मंत्रियों, 18 सांसदों और राजपक्षे परिवार के प्रति वफादार नेताओं के घरों पर हमला किया। वीडियो फुटेज में हंबनटोटा शहर के मेदामुलाना में महिंदा राजपक्षे और उनके छोटे भाई एवं राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे का आवास जलता दिखाई दे रहा है।
8-कुरुनेगला स्थित महिंदा राजपक्षे के आवास में भी प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी और भीड़ ने हंबनटोटा के मेदामुलाना में महिंदा और गोटबाया के पिता की स्मृति में निर्मित डी ए राजपक्षे मेमोरियल को भी नष्ट कर दिया। हॉस्पिटल के सूत्रों के अनुसार इस बीच हाल की झड़पों में घायल हुए लोगों की संख्या बढ़कर 249 हो गई है जबकि आठ लोगों की मृत्यु हुई है।
10-श्रीलंकाई संसद के अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्धना ने राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे से बोला कि वे मौजूदा स्थिति पर चर्चा करने के लिए जल्द से जल्द सदन का सत्र बुलाएं। संसदीय ऑफिसरों ने बोला कि राष्ट्रपति को 17 मई की निर्धारित तिथि से पहले संसद सत्र फिर से बुलाना होगा क्योंकि वर्तमान में कोई पीएम और गवर्नमेंट नहीं है। गवर्नमेंट विरोधी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरूद्ध हिंसा भड़काने के लिये विपक्षी दल महिंदा राजपक्षे की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रपति कार्यालय के सूत्रों ने बोला कि गोटबाया राजपक्षे को गवर्नमेंट बनाने के लिए संसद में अगुवाई करने वाले सियासी दलों के नेताओं से मिलना है। अध्यक्ष अभयवर्धना ने यह भी बोला कि उन्होंने स्वयं पार्टी नेताओं की एक बैठक की सूचना दी थी ताकि सत्र को फिर से बुलाने के लिये सदन के कामकाज पर चर्चा की जा सके।