रायपुर: आदिवासी पृष्ठभूमि के वरिष्ठ नेता अरविंद नेताम ने कांग्रेस पार्टी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना त्याग-पत्र दे दिया है, जो छत्तीसगढ़ में अगले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका है। यह कार्रवाई सर्व आदिवासी समाज के नेतृत्व में एक एकदम नयी सियासी ताकत के रूप में सामने आई है, जो नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों में ताल ठोंकने की तैयारी कर रही है।
अपने इस्तीफे के कारण के बारे में पूछे जाने पर नेताम ने मीडिया से बोला कि, ‘छत्तीसगढ़ में मौजूदा कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट के अनुसार आदिवासी समुदायों की उपेक्षा सहित कई कारण हैं। PESA नियमों को कमजोर करना इस बात का प्रमुख उदाहरण है कि कैसे कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने में सबसे कम दिलचस्पी रखती है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और जाने-माने आदिवासी नेता अरविंद नेताम का कांग्रेस पार्टी पार्टी से जुड़ाव का एक लंबा इतिहास रहा है और उन्होंने आदिवासी समूहों की चिंताओं को आगे बढ़ाने में जरूरी किरदार निभाई है। सर्व आदिवासी समाज के नेतृत्व वाली नयी पार्टी आदिवासी जनसंख्या को अपने मुद्दों और लक्ष्यों को व्यक्त करने के लिए एक मंच प्रदान करने का दावा करती है।
इसके नेताओं का तर्क है कि कांग्रेस पार्टी और भाजपा, साथ ही अन्य प्रमुख दल, जल, जंगल और जमीन की रक्षा और अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार (PESA) अधिनियम को क्रियान्वित करने जैसे कई मुद्दों को संबोधित करने में विफल रहे हैं। बता दें कि, पूर्व केंद्रीय मंत्री नेताम, जिन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल स्तर पर पीवी नरसिम्हा राव और इंदिरा गांधी प्रशासन में कार्य किया, ने पहले ही एक नया सियासी संगठन बनाने की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी है। सर्व आदिवासी समाज के सदस्य नेताम ने पहले बोला था कि नयी पार्टी 90 सदस्यीय राज्य विधान सभा के आनें वाले चुनावों में कम से कम 50 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी। पिछले वर्ष दिसंबर में भंडूप्रतापपुर (एसटी) विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने अपना उम्मीदवार अकबर पाम कोर्राम को मैदान में उतारा था और उन्हें 23,000 से अधिक वोट मिले थे।