नई दिल्ली: आज पूरे राष्ट्र में पीएम मोदी का जन्मदिन बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है, इस खास दिन पर अफ्रीका से लाये गए 8 चीतों को मोदी ने विशेष बाढ़ों में छोड़ा है. ऐसे में आज सबके लिए चर्चा का विषय अफ्रीका से लाए गए चीते है. इन्हे लेकर लोगों के मन में कई प्रश्न है, कि आखिर ये कैसे रहेंगे, इनकी देखभाल कौन करेगा? तो आज हम आपके इस प्रश्न का भी उत्तर दे रहे है. दरअसल मध्य प्रदेश की चंबल घाटी में कभी खौफ और भय फैलाने वाले कुख्यात बदमाश रमेश सिंह सिकरवार अब ‘चीता दोस्त’ बन गए हैं. आइए जानते है इनके ज़िदंगी के कुछ ऐसे अनकहे पन्ने जिनके बारे में आम जनता नहीं है…
सरेंडर के बाद समाजसेवा
रमेश सिंह सिकरवार अब क्षेत्रीय निवासियों के बीच अफ्रीका के 8 चीतों के महत्व को बढ़ावा दे रहे हैं और लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए काम कर रहे हैं. 1970 से 1980 के दशक तक चंबल घाटी पर राज करने वाले 72 वर्षीय रमेश सिंह सिकरवार पर डकैती और 70 से अधिक हत्याओं के 250 से अधिक मुद्दे हैं. हालांकि 1984 में सरेंडर करने के बाद से वह समाज सेवा कर रहे हैं.
प्रभाव और प्रतिष्ठा अभी भी बरकरार
रमेश सिंह सिकरवार श्योपुर और मुरैना क्षेत्र के 175 गांवों के ‘प्रमुख’ के रूप में जाने जाते हैं. 1984 में उसने अपने रैकेट के 32 सदस्यों के साथ सेरेण्डर कर दिया. उस समय राज्य गवर्नमेंट ने उसके रैकेट पर एक लाख रुपये से अधिक के पुरस्कार की घोषणा की थी. आठ वर्ष कारागार की सजा काटने के बाद, सीकरवार ने आपराधिक दुनिया को तोड़ दिया. अब वे करहल में खेती कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं. कई अन्य बदमाशों की तरह, सिकरवार भी अपने क्राइम से बच गया है. हालांकि, उनका असर और प्रतिष्ठा अभी भी बरकरार है.
50 चीतों को हिंदुस्तान लाने की योजना
अफ्रीका के नामीबिया से आठ चीतों को आज 17 सितंबर को मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में लाया गया. इस कार्यक्रम का उद्घाटन पीएम मोदी ने किया है. गवर्नमेंट की योजना अगले पांच सालों में 50 और चीतों को हिंदुस्तान लाने की है. इस पृष्ठभूमि में, सिकरवार अपने दो दर्जन सहयोगियों के साथ आसपास के गांवों में चीतों के बारे में जागरूकता पैदा करने का काम कर रहे हैं.
रमेश सिंह सिकरवार ने कहा…
अपने अतीत पर टिप्पणी करते हुए रमेश सिंह सिकरवार ने बोला कि 1975 में 22 वर्ष की उम्र में, मैंने अन्याय से लड़ने और अपने लालची चाचाओं से अपने परिवार की रक्षा करने के लिए विद्रोह किया. श्योपुर, गुना और मुरैना के क्षेत्रों में नौ वर्ष तक शासन किया, लेकिन मैंने कभी कोई अन्याय नहीं किया. इसलिए लोगों में मेरे प्रति सम्मान और असर की भावना है. हमने लोगों पर तब तक हमला नहीं किया जब तक उन्हें उकसाया नहीं गया. सीकरवार ने उत्तर दिया है कि चीता भी ऐसा ही एक जानवर है, जब तक उकसाया नहीं जाता तब तक वह किसी पर हमला नहीं करता. वह एक अंग्रेजी मीडिया से बात कर रहे थे.