प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए जनता के सामने अपना एजेंडा रख दिया है. मोदी ने भोपाल में मंगलवार को भाजपा के कार्यकर्ताओं को समझाया कि उन्हें जनता के बीच जाकर क्या बोलना है. मोदी का एजेंडा नंबर 1 है, यूनिफॉर्म सिविल कोड. पहली बार मोदी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड पर सीधी और साफ बात की. मोदी ने बोला कि एक ही घर में परिवार के लोगों के लिए भिन्न-भिन्न कानून होंगे तो घर कैसे चलेगा, सबके लिए समान कानून होना महत्वपूर्ण है. मोदी ने बोला कि उच्चतम न्यायालय भी बार-बार यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की बात कहता है लेकिन विरोधी दलों के नेता इसे केवल मुसलमानों से जोड़कर वोट के चक्कर में उन्हें डराते हैं, गुमराह करते हैं. मोदी ने पसमांदा मुसलमानों की बात की, दूसरे राष्ट्रों का उदाहरण दिया. मोदी का संदेश यह था कि गवर्नमेंट समान आचार संहिता लागू करने पर आगे बढ़ेगी. जैसे ही मोदी का बयान आया तो विरोधी दलों में हलचल मच गई. शरद पवार, भूपेश बघेल, तारिक अनवर, मनोज झा, विजय चौधरी और असदुद्दीन ओवैसी से लेकर अबु आज़मी और जमीयत उलेमा ए हिन्द के नेता तक सब बोले. सब ने मोदी पर हमला किया. मोदी ने जितने विस्तार से समान नागरिक संहिता की बात की, उससे ये साफ हो गया कि मोदी गवर्नमेंट जल्द ही इसे लेकर कानून ला सकती है. मोदी ने बोला कि उच्चतम न्यायालय तो कब से कॉमन सिविल कोड लाने को कह रहा है. मोदी ने बोला कि यदि एक घर में दो कानून नहीं चल सकते तो फिर एक राष्ट्र में दो कानून कैसे चल सकते हैं? मोदी ने बोला जो लोग समान नागरिक संहिता का विरोध कर रहे हैं, वो इसी तरह तीन तलाक़ को इस्लाम का महत्वपूर्ण हिस्सा बता कर उसे समाप्त करने का विरोध कर रहे थे. मोदी ने कहा, हकीकत ये है कि अनेक इस्लामी देशों ने तीन तलाक को 90 वर्ष पहले समाप्त कर दिया है. यदि तीन तलाक़ इस्लाम का महत्वपूर्ण अंग होता, तो पाकिस्तान, इंडोनेशिया, कतर, जॉर्डन जैसे मुसलमान राष्ट्र इसे समाप्त क्यों करते? मोदी ने उन लोगों को भी उत्तर दिया जो भाजपा को मुस्लिम को शत्रु बताते हैं. मोदी ने बोला कि उन्होंने सबका साथ सबका विकास के मंत्र पर काम किया है, पसमांदा मुसलमानों के लिए किए गए गवर्नमेंट के काम इसका सबूत हैं. मोदी ने बोला कि कुछ पार्टियां और लोग पसमांदा मुसलमानों को मुस्लिम नहीं समझते, उनसे भेदभाव करते हैं, उन्हें अछूत मानते हैं. मोदी के भाषण के तुरंत बाद हैदराबाद से AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी का रिएक्शन आया. ओवैसी ने पूछा, क्या हिन्दू मैरिज एक्ट समाप्त हो जाएगा? क्या मोदी अविभाजित हिन्दू परिवार कानून समाप्त कर देंगे? क्या ईसाइयों और दूसरी जनजातियों की परंपराओं पर पबांदी लगा दी जाएगी? ओवैसी ने बोला कि यूनिफॉर्म सिविल कोड संविधान की भावना के विरूद्ध है. यदि मोदी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेंगे तो क्या कुरान की आयातों का पालन करने पर रोक लग जाएगी? बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी ने अनेक दलीलें देकर ये साबित करने की प्रयास की कि मोदी केवल चुनावी झुनझुना बजा रहे हैं, वोटों का ध्रुवीकरण करने की प्रयास कर रहे हैं, पर होगा कुछ नहीं. ममता बनर्जी ने कहा, मोदी का मुसलमानों के प्रति प्रेम केवल दिखावा है, मोदी गवर्नमेंट केवल छह महीने की अतिथि है, इसलिए इस तरह के छलावे में फंसने की आवश्यकता नहीं है. यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर मुसलमान संगठन और मौलाना भी सक्रिय हो गए हैं. मंगलवार रात को ऑल इण्डिया मुसलमान पर्सनल लॉ बोर्ड की मीटिंग हुई, जिसमें तय हुआ कि लॉ कमिशन को बोर्ड की तरफ से ब्य़ौरा दिया जाएगा. इस मीटिंग में बोर्ड के चेयरमैन सैफुल्लाह रहमानी और ज़मीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी उपस्थित थे. जमीयत के सचिव नियाज़ फारुकी ने बोला कि जब विधि आयोग इस पर काम कर रहा है तो पीएम को बयान देकर उस पर दबाव बनाने की प्रयास नहीं करनी चाहिए थी. मोदी के बयान पर इतना हंगामा क्यों हो रहा है, इसकी वजह भी जान लीजिए. मोदी यदि केवल कॉमन सिविल कोड की बात करते तो विरोधी दलों से इतना तीखा रिएक्शन न आता. वैसे मोदी ने पसमांदा मुसलमानों की बात कर दी, उनके प्रति हमदर्दी जता दी, इससे अधिक परेशानी है. पसमांदा फारसी शब्द है, इसका मतलब होता है – जो पीछे छूट गए हैं, जो पिछड़े हैं, सताए हुए हैं. हिंदुस्तान में मुसलमानों की कुल जनसंख्या का 85 फीसदी पसमंदा मुस्लिम है. केवल 15 पर्सेंट मुस्लिम उच्च वर्ग के हैं जिन्हें अशरफ कहते हैं. इनके अतिरिक्त 85 पर्सेंट पिछड़े, शोषित, वंचित हैं, जिन्हें अरजाल और अज़लाफ़ बोला जाता है. मोदी ने मुसलमानों के 85 पर्सेंट तबके के प्रति हमदर्दी दिखाई है, उनकी तरक्की की बात की है, इसीलिए ओवैसी से लेकर ममता तक सब परेशान हैं, क्योंकि सबको मुसलमान वोट बैंक में सेंध की फिक्र है. मोदी ने जिस तरह से पसमांदा मुसलमानों की बात की, जिस तरह समान नागरिक संहिता पर साफ-साफ शब्दों में बात की, उससे ये तो साफ हो गया कि अब 2024 के चुनाव का यूनिफॉर्म सिविल कोड एक बड़ा राजनीतिक इश्यू बनेगा. जिस तरह से पीएम ने कॉमन सिविल कोड पर सीधी और साफ बात की, उससे लग रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो जाएगा और विरोधी दल ये बात जानते हैं कि यदि नरेन्द्र मोदी ने ये काम कर दिया तो फिर न मोदी-विरोधी मोर्चे से बात बनेगी, न विपक्षी एकता काम आएगी.
भ्रष्टाचार के विरूद्ध मोदी की ‘गारंटी’
नरेन्द्र मोदी का एजेंडा नंबर दो है, विरोधी दलों के नेताओं के करप्शन को जनता के सामने उजागर करना. मोदी ने पहली बार नाम लेकर कांग्रेस, आरजेडी, NCP, तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेताओं पर लगे करप्शन के इल्जामात आंकड़े देकर गिनाये – किसने कितने हजार या लाख करोड़ का घोटाला किया. मोदी ने बोला कि विरोधी दलों की गारंटी है कि वो करप्शन नहीं छोड़ेंगे, लेकिन मोदी की गारंटी है कि किसी भ्रष्टाचारी को नहीं छोड़ेंगे, सबका हिसाब करेंगे. मोदी का एजेंडा नंबर 3 है, परिवारवाद की राजनीति का पुरजोर विरोध. मोदी ने बोला विरोधी दलों के नेता मुफ़्त की गारंटियां देते है, केवल अपने अपने परिवार के लाभ के लिए काम करते हैं और भाजपा जनता के लाभ के लिए काम करती है. 23 जून को जब पटना में 15 विपक्षी दलों की मीटिंग हुई थी तब मोदी अमेरिका की सरकारी यात्रा पर थे, इसलिए मोदी इस मीटिंग पर आज बोले. मोदी ने बोला कि जो विरोधी दल एक-दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते, वो भी उनके विरूद्ध एक साथ आ रहे हैं. मोदी ने 2014 और 2019 के चुनाव का उदाहरण देते हुए बोला कि उनके विरूद्ध इस तरह का गठबंधन पहले भी बना था और हारा था. इस बार भी राष्ट्र की जनता ने तय कर लिया है कि 2024 में एक बार फिर भाजपा की गवर्नमेंट बनानी है. मोदी ने बोला कि विपक्षी पार्टियों में आजकल गारंटी देने का फैशन चल रहा है. कोई फ्री बिजली की गारंटी देता है तो कोई फ्री राशन की, जबकि हकीकत ये है कि इन पार्टियों की सरकारें केवल भ्रष्टाचार की गारंटी दे सकती है. मोदी ने नाम लेकर हर पार्टी के घोटालों की लिस्ट गिना दी. मोदी ने बोला कि ये विपक्षी पार्टियां तो घोटाले की गारंटी देती हैं लेकिन आज वो राष्ट्र को इस बात की गारंटी देना चाहते हैं कि जो भी जनता के पैसों को लूटेगा, करप्शन करेगा, उनकी गवर्नमेंट उसे छोड़ेगी नहीं. मोदी ने बोला कि यदि लोग शरद पवार की बेटी की भलाई चाहते हैं तो एनसीपी को वोट दें, यदि लोग लालू के बेटों और बेटियों की भलाई चाहते हैं, तो वे आरजेडी को वोट दें, यदि लोग मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश की भलाई चाहते हैं तो वे सपा को वोट दें, यदि लोग के। चंद्रशेखर राव की बेटी की भलाई चाहते हैं, तो वे बीआरएस को वोट दें, यदि लोग करुणानिधि के परिवार की भलाई चाहते हैं, तो वे डीएमके को वोट दें, लेकिन यदि लोग अपने बेटों-बेटियों ओर पोतों की भलाई चाहते हैं, तो वे भाजपा को वोट दें. मोदी ने जो बोला वो विरोधी दलों के पिछले कई महीनों के कैंपेन के एक-एक पॉइंट का उत्तर था. मोदी ने जो बोला वो आने वाले चुनाव के लिए भाजपा की रणनीति का संकेत था. विरोधी दलों का सबसे संगीन आरोप ये है कि मोदी गवर्नमेंट अपने विरोधियों के विरूद्ध CBI और प्रवर्तन निदेशालय का उपयोग करती है. मोदी ने विरोधी दलों के नेताओं के भ्रष्टाचातार के मुद्दे गिना दिए और साफ कर दिया कि इस मुद्दे में विरोधी दलों के नेताओं को राहत देने का उनका कोई इरादा नहीं है, करप्शन के विरूद्ध उनकी गवर्नमेंट का अभियान ,सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय का एक्शन बदस्तूर जारी रहेगा. विरोधी दलों का दूसरा बड़ा आरोप ये है कि मोदी के राज में मुस्लिम परेशान हैं, मोदी गवर्नमेंट मुसलमान विरोधी है और ये प्रश्न इंटरनेशनल मीडिया में भी उठाए जाते हैं. मोदी ने साफ कर दिया कि वो इस तरह की बयानबाजी से डरने वाले नहीं हैं. उन्होंने समझा दिया कि वो राष्ट्र में मुसलमानों की भलाई के नाम पर की जाने वाली राजनीति को नहीं चलने देंगे, तुष्टीकरण की राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेंगे. जले पर नमक छिड़कने के लिए मोदी ने ये भी कह दिया कि राष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड होना चाहिए, सबके लिए एक जैसा कानून होना चाहिए. मोदी के एजेंडे की तीसरी बड़ी बात ये है कि विरोधी दलों की एकता उनके अपने लाभ के लिए है. पटना में जितने भी विरोधी दलों के नेता इकट्ठे हुए थे मोदी ने बताया कि वो सब अपने परिवार की विरासत को बचाने के लिए अपने बेटे और बेटियों को राजनीति में चमकाने के लिए इकट्ठा हुए. हालांकि पटना में जो नेता उपस्थित थे वो मानते हैं कि यदि उनके बेटे या बेटियां राजनीति में आते हैं उनकी पार्टियों को संभालते हैं तो इसमें कुछ भी बुरा नहीं है. लालू यादव तेजस्वी को आगे करें या शरद पवार सुप्रिया को आगे बढ़ाएं इसमें क्या गलत है? यदि राहुल राजीव के बेटे हैं, अखिलेश मुलायम के बेटे हैं तो इसमें क्या प्रॉब्लम है? मोदी ने आज इस बात को आड़े हाथों लिया. उन्होंने बोला ये सब लोग अपने बच्चों का अपने परिवार का भला चाहते हैं यदि राष्ट्र की जनता अपने परिवार का अपने बेटे बेटियों का कल्याण चाहती है तो उन्हें भाजपा का, मोदी का साथ देना चाहिए. विरोधी दलों की राजनीति का एक और पहलू है चुनाव के मौके पर निःशुल्क की चीजें बांटना, बिजली, पानी और सर्विस फ्री देने की गारंटी देना. आज ये भी मोदी के एजेंडे पर था. मोदी ने बोला ऐसा करने वाले नेता केवल अपनी पार्टी का भला चाहते हैं वो ये सब इसलिए करते हैं कि उन्हें कमीशन मिले, कट मनी मिले. कुल मिलाकर मोदी ने आज अपने भाषण से दो काम किए – विरोधी दलों के कैंपेन के एक-एक प्वाइंट का उत्तर दिया और दो, अपने कार्यकर्ताओं को टॉपिक प्वाइंट दिए, उन्हें समझाया कि जनता के बीच जाकर उन्हें क्या बोलना है.