जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर में 1996 के बाद 2024 लोकसभा के लिए सबसे अधिक 37.98 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. वहीं पाक के कब्जे वाले कश्मीर में कश्मीरी 9 मई से इस्लामाबाद के सौतेले व्यवहार के विरुद्ध आवाज बुलंद करते दिखे. पाक के कब्जे वाले कश्मीर में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. मुजफ्फराबाद समते कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी तक देखने को मिली है. 90 से अधिक लोगों को प्रदर्शन के दौरान चोटें लगी हैं. विरोध प्रदर्शन का कारण छापेमारी और गिरफ्तारियों का दौर देखने को मिल रहा है. हालाँकि, पाक के पीएम शहबाज़ शरीफ़ द्वारा सोमवार को 23 बिलियन पाकिस्तानी रुपये के पैकेज की घोषणा के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन बंद कर दिया गया है. लेकिन श्रीनगर घाटी में आर्थिक असमानताओं और कब्जे वाले कश्मीरियों में शोषित जनता के बढ़ने के बावजूद यह इस्लामाबाद के लिए एक खतरे का संकेत है.
पश्चिमी मीडिया में नहीं मिली प्रदर्शन को उतनी कवरेज