PMGKAY News: पीएम मोदी ने पिछले दिनों पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) को पांच वर्ष के लिए आगे बढ़ाने का घोषणा किया है। योजना के अनुसार राष्ट्र की 80 करोड़ जनता निःशुल्क राशन दिया जाता है। एक अनुमान के अनुसार योजना को दिसंबर 2028 तक जारी रखने के लिए करीब 11 लाख करोड़ रुपये का खर्च होगा। सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव अगले कुछ हफ्तों में केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखने जाने की आशा है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को छत्तीसगढ़ में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए योजना के विस्तार की घोषणा की थी। इसके अनुसार लाभार्थियों को निःशुल्क में 5 किलो चावल, गेहूं और मोटा अनाज दिया जाता है।
GDP का आकार 272.41 लाख करोड़ रुपये
पीआईबी की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022-23 में राष्ट्र की जीडीपी का आकार 272.41 लाख करोड़ रुपये था। यदि पीएमजीकेएवाई पर पांच वर्ष में यदि 11 लाख करोड़ खर्च होता है तो यह राष्ट्र की कुल जीडीपी का करीब 4 प्रतिशत होता है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ‘भारत आटा’ की बिक्री प्रारम्भ करने के मौके पर बोला कि केंद्र 5 वर्ष तक पीएमजीकेएवाई की पूरी लागत उठाएगा। केंद्र गवर्नमेंट की तरफ से कोविड में प्रारम्भ की गई इस अन्न योजना को दिसंबर 2022 में एक वर्ष के लिए आगे बढ़ाया गया था।
एक वर्ष में दो लाख करोड़ रुपये का खर्च
दिसंबर, 2022 में निःशुल्क अनाज की योजना को एक वर्ष आगे बढ़ाने का निर्णय किया गया था। उस समय इस योजना पर सब्सिडी का खर्च करीब दो लाख करोड़ रुपये होने का संभावना व्यक्त किया गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित समाचार के मुताबिक योजना पर पांच वर्ष में कुल लागत करीब 11 लाख करोड़ रुपये की होगी। आशा की जा रही है कि एमएसपी में इजाफे और अनाज के व्यवस्था के लिए एफसीआई की तरफ से आर्थिक लागत के कारण खाद्य सब्सिडी पर खर्च सालाना 5-6% की रेट से बढ़ेगा।
योजना को जारी रखने में खरीदे गए अनाज का भंडारण, परिवहन, प्रबंधन और हानि सभी कुछ शामिल होता है। पिछले दो फाइनेंशियल ईयर में धान और गेहूं के एमएसपी में सालाना 5-7% का बढ़ोत्तरी हुआ है। 2023-24 के लिए चावल और गेहूं की लागत 2021-22 में क्रमशः 35.6 रुपये और 24.7 रुपये किलो से बढ़कर 39.2 रुपये प्रति किलो और 27 रुपये प्रति किलो तक होने का अनुमान है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अनुसार एफसीआई को पीएमजीकेएवाई के लिए हर वर्ष करीब 55-60 मिलियन टन अनाज की आवश्यकता है।