गुजरात में एक बार फिर से भाजपा की गवर्नमेंट बनती दिख रही है. पार्टी पुराने सभी रिकॉर्ड को तोड़ते हुए इस बार सबसे अधिक सीटें जीतने की ओर बढ़ रही है. दोपहर 12 बजे तक के रुझानों में भाजपा 150 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है. कांग्रेस पार्टी के इतिहास के सबसे खराब प्रदर्शन करने की आसार है. वहीं, राज्य में आम आदमी पार्टी ने भी घुसपैठ कर ली है और ठीक-ठाक वोट हासिल कर रही. राज्य में भाजपा की लगातार 27 वर्षों से सत्ता है, लेकिन उसके बाद भी अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज करना पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है. यहां तक कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब वर्ष 2002 में पार्टी को सबसे अधिक 127 सीटें मिली थीं. अब पार्टी को 150 से अधिक सीटों पर बढ़त हासिल है.. सियासी एक्सपर्ट भाजपा की इस जीत के पीछे कई फैक्टर्स मान रहे हैं.
गुजरात में केवल मोदी पर ही अब निर्भर नहीं बीजेपी
साल 2014 में पीएम बनने के बाद प्रश्न खड़े होने लगे थे कि क्या गुजरात में भाजपा बिना मोदी के पहले की तरह धमक कायम रख पाएगी? कुछ ही वर्षों में कई मुख्यमंत्रियों के परिवर्तन के बाद कयासबाजी तेज हो गई थी. पटेल आंदोलन की वजह से भी भाजपा को बैकफुट पर आना पड़ा था, लेकिन 27 वर्षों के बाद भी पार्टी अब जब इतिहास रचने के करीब पहुंच गई है तो यह साबित हो गया है कि गुजरात भाजपा के पास ऐसे नेता हैं, जो जीत सुनिश्चित कर सकते हैं. सीएम भूपेंद्र पटेल, गृह मंत्री हर्ष सांघवी, हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर समेत भाजपा के पास राज्य में ऐसे नेताओं की पूरी एक लाइन है, जो पार्टी को मजबूत बनाते हैं. हालांकि, इसमें भी दो राय नहीं है कि पीएम मोदी केवल गुजरात यूनिट के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र में भाजपा के सर्वोच्च नेता हैं और चुनाव प्रचार के दौरान हुए उनके रोड शो, रैलियों में आई भीड़ से यह साबित भी होता है.
एंटी इनकमबेंसी की कोई स्थान नहीं
गुजरात में 27 वर्षों से भाजपा की गवर्नमेंट होने के बाद अब भी एंटी इनकमबेंसी जैसे शब्द कहीं दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रहे हैं. माना जाता है कि जब कोई दल लंबे समय तक राज कर लेता है, तो वोटर्स कोई न कोई मुद्दों पर उससे नाराज होते ही हैं, लेकिन गुजरात में एंटी इनकमबेंसी का कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है. यहां तक कि एक दिन पहले ही एमसीडी चुनाव में भाजपा की हार की वजह एंटी इनकमबेंसी बनी, लेकिन अगले दिन आ रहे गुजरात के नतीजों में इसका कोई असर नहीं देखने को मिल रहा. यहां तक कि राज्य में इसका उलट असर हुआ और पार्टी को सबसे अधिक सीटें हासिल हो रहीं.
विकास के मॉडल की कोई काट नहीं
नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के पीछे गुजरात मॉडल का अहम सहयोग रहा है. भाजपा ने 2014 का लोकसभा चुनाव पूरा विकास के मामले पर लड़ा और बड़ी जीत दर्ज की. पीएम मोदी के लिए गुजरात काफी खास रहा है. यहां पर किए गए विकास कार्यों की वजह से उन्हें वर्षों तक जीत मिलती रही. वहीं, उनके पीएम बनने के बाद अन्य मुख्यमंत्रियों ने भी राज्य के विकास पर काफी ध्यान रखा, जिसका लाभ वर्तमान विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिला.
अहमद पटेल के नहीं रहने से कांग्रेस पार्टी को हुआ नुकसान!
अहमद पटेल के मृत्यु के बाद कांग्रेस पार्टी को कई स्थान उनकी कमी महसूस हुई. सोनिया गांधी के सबसे करीबी नेताओं में रहने वाले अहमद पटेल का मृत्यु कोरोनाकाल में हो गया था. गुजरात से आने वाले अहमद पटेल के नहीं रहने से कांग्रेस पार्टी को गुजरात में हानि हुआ है. दरअसल, पार्टी के पास अब राज्य स्तर पर कोई ऐसा नेता नहीं बचा है, जिसका कद भाजपा के राज्य नेतृत्व के बराबर हो. चूंकि, अहमद पटेल गुजरात यूनिट और कांग्रेस पार्टी आलाकमान के बीच भी एक पुल की तरह भी काम करते थे, ऐसे में अब उनके नहीं रहने के चलते पार्टी उनके स्तर के बराबर के नेता की कमी जरूर महसूस कर रही होगी.
आदिवासी इलाकों में बनाई पकड़
गुजरात में भाजपा की बड़ी जीत के पीछे आदिवासी इलाकों में पकड़ बनाना भी एक वजह है. पिछले चुनाव भारतीय ट्राइबर पार्टी (BTP) ने दो सीटों पर अतिक्रमण जमाया था. ये सीटें झगड़िया और देदियापाड़ा थीं. अब इन दोनों सीटों पर भाजपा उम्मीदवार आगे चल रहे हैं. दोपहर 12 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, झगड़िया सीट से भाजपा के रितेशकुमार वसावा पहले नंबर पर, दूसरे नंबर पर छोटू भाई वसावा और कांग्रेस पार्टी उम्मीदवार तीसरे नंबर पर चल रहे हैं. वहीं, देदियापाड़ा सीट की बात करें तो यहां भी भाजपा पहले नंबर पर चल रही है. यानी कि गुजरात चुनाव में भाजपा को न केवल शहरी, ग्रामीण जनता का वोट हासिल हुआ, बल्कि इस बार उसने आदिवासी इलाकों में भी सेंधमारी करने में सफलता हासिल कर ली है.