प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं के साथ वार्ता की। सभा को संबोधित करते हुए पीएम ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शिक्षकों को यह भी याद दिलाया कि हिंदुस्तान के वर्तमान राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाना अधिक जरूरी है जो एक शिक्षक भी हैं। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “आज जब राष्ट्र ने आजादी का अमृत महोत्सव के अपने विशाल सपनों को पूरा करना प्रारम्भ कर दिया है, शिक्षा के क्षेत्र में सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कोशिश हम सभी को प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर, मैं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी शिक्षकों को शुभकामना देता हूं”। इस मौके पर पीएम ने शिक्षकों के ज्ञान और सरेंडर पर प्रकाश डाला और बताया कि उनकी सबसे बड़ी गुणवत्ता एक सकारात्मक दृष्टिकोण है जो उन्हें विद्यार्थियों के साथ उनके सुधार के लिए लगातार काम करने में सक्षम बनाता है।
पीएम मोदी ने कहा, “एक शिक्षक की किरदार एक आदमी को प्रकाश दिखाना है और यह वही है जो सपनों को बोता है और उन्हें सपनों को संकल्प में बदलना सिखाता है”। पीएम ने कहा, 2047 के हिंदुस्तान का राज्य और भाग्य आज के विद्यार्थियों पर निर्भर है और उनके भविष्य को आज के शिक्षकों द्वारा आकार दिया जा रहा है। इसलिए आप विद्यार्थियों को उनके जीवन को आकार देने में सहायता कर रहे हैं और रूपरेखा को भी रूप दे रहे हैं। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, जब एक शिक्षक विद्यार्थी के सपनों से जुड़ जाता है, तो उसका सम्मान और स्नेह पाने में उसे कामयाबी मिलती है।
प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष और अंतर्विरोधों को दूर करने के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने बोला कि यह जरूरी है कि एक विद्यार्थी स्कूल, समाज और घर में जो अनुभव करता है उसमें कोई विरोध नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों के पोषण के लिए विद्यार्थियों के परिवारों के साथ शिक्षकों और भागीदारों द्वारा एक एकीकृत दृष्टिकोण की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए पसंद-नापसंद न रखने और हर विद्यार्थी के साथ समान व्यवहार करने की भी राय दी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मिली सराहना पर भी डाला प्रकाश
प्रधानमंत्री ने ‘पंच प्राण’ की अपनी स्वतंत्रता दिवस की घोषणा को याद किया और सुझाव दिया कि इन पंच प्राणों पर विद्यालयों में नियमित रूप से चर्चा की जा सकती है ताकि विद्यार्थियों के लिए उनकी भावना साफ हो। उन्होंने बोला कि इन प्रस्तावों को देश की प्रगति के लिए एक मार्ग के रूप में सराहा जा रहा है और हमें इसे बच्चों और विद्यार्थियों तक पहुंचाने का एक उपाय खोजने की आवश्यकता है। पीएम ने कहा, “पूरे राष्ट्र में ऐसा कोई विद्यार्थी नहीं होना चाहिए जिसके पास 2047 का सपना न हो”। उन्होंने बोला कि दांडी यात्रा और हिंदुस्तान छोड़ो के बीच के सालों के दौरान राष्ट्र में व्याप्त भावना को फिर से बनाने की आवश्यकता है।
पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को लेकर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने सराहा
पीएम मोदी ने कहा, अब हम नहीं रुकेंगे। हम सिर्फ आगे बढ़ेंगे
पीएम मोदी ने कहा, हमने हजारों वर्ष की गुलामी की बेड़ियों को तोड़ा है और अब हम नहीं रुकेंगे। हम सिर्फ आगे बढ़ेंगे। अपने संबोधन का समाप्ति करते हुए पीएम ने राष्ट्र के शिक्षकों से हिंदुस्तान के भविष्य में एक समान भावना को आत्मसात करने का आग्रह किया ताकि इसकी ताकत कई गुना बढ़े। इस अवसर पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान और शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी मौजूद थीं। आज हिंदुस्तान अपना 50वां राष्ट्रीय शिक्षक दिवस मना रहा है। यह दिन हर वर्ष 5 सितंबर को मनाया जाता है जो हिंदुस्तान के दूसरे राष्ट्रपति डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती है, जो एक विद्वान, दार्शनिक और हिंदुस्तान रत्न से सम्मानित भी थे।