स्त्री अधिकारों (Women Rights) के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने सोमवार को पीएम मोदी से स्त्रियों के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर प्रश्न किया। दरअसल पीएम ने राष्ट्र के 76वें स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में ‘नारी शक्ति’ की सराहना की थी।
प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में बोला कि हिंदुस्तान की तरक्की के लिए स्त्रियों का सम्मान एक जरूरी स्तंभ है और उन्होंने ‘नारी शक्ति’ का समर्थन करने की जरूरत पर जोर दिया।
सामाजिक कार्यकर्ता और साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी देने की दिशा में काम करने वाले गैर-लाभकारी संगठन ‘आकांक्षा श्रीवास्तव फाउंडेशन’ की संस्थापक आकांक्षा श्रीवास्तव ने बोला कि पहला और अहम मामला है स्त्री सुरक्षा और शिक्षा।
कई कस्बों के विद्यालय में शौंचालय तक नहीं
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से वार्ता में कहा,‘‘लड़कियों के लिए शिक्षा तक पहुंच में बहुत असमानता है, तो देखना चाहती हूं कि इस संबंध में नीतियों में क्या परिवर्तन है। कई ऐसे कस्बे हैं जहां लड़कियों के लिए विद्यालयों में शौचालय नहीं हैं क्योंकि ऐसी मानसिकता है कि लड़कियां अपनी शिक्षा को गंभीरता से नहीं लेती।’’ आकांक्षा प्रश्न करती हैं कि निर्भया कोष के जरिए जो सुरक्षा कदम उठाए जाने थे,वे कहां हैं।
‘ऑल इण्डिया प्रोग्रेसिव विमेन्स असोसिएशन’की सदस्य कविता कृष्णन ने बोला कि जब एक निर्वाचित प्रतिनिधि रोजमर्रा की जीवन में ‘महिलाओं के प्रति मानसिकता बदलने’ की जरूरत की बात करता है,तो हमेशा उसका स्वागत किया जाता है।