पार्टी के एक आधिकारिक बयान में सोमवार को बोला गया कि 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले, गुजरात में 26 सीटों पर चुनाव लड़ने की जिम्मेदारियां नेशनल कांग्रेस पार्टी पार्टी (एआईसीसी) के तीन सचिवों के बीच बांट दी गई हैं।
2024 लोकसभा चुनाव सभी सियासी दलों के लिए काफी जरूरी है। हालांकि, मुख्य मुकाबला बीजेपी और इण्डिया गठबंधन के बीच बताया जा रहा है। इण्डिया गठबंधन में 26 सियासी दल हैं जो बीजेपी के विरुद्ध एकजुट हुए हैं। विभिन्न राज्यों में गठबंधन में शामिल सियासी दलों की ओर से चुनावी रणनीति बनाई जा रही है। इन सब के बीच पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के गढ़ में कांग्रेस पार्टी ने जबरदस्त तैयारी की है। जी हां, हम बात गुजरात के कर रहे हैं। गुजरात की लोकसभा की 26 सीटों के लिए कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ी और सोची-समझी रणनीति बनाई है। गुजरात की कुल 26 सीटों को कांग्रेस पार्टी ने तीन भागों में बांटा है और इसकी कमान भिन्न-भिन्न व्यक्तियों को सौंपी है।
पार्टी के एक आधिकारिक बयान में सोमवार को बोला गया कि 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले, गुजरात में 26 सीटों पर चुनाव लड़ने की जिम्मेदारियां नेशनल कांग्रेस पार्टी पार्टी (एआईसीसी) के तीन सचिवों के बीच बांट दी गई हैं। एआईसीसी सचिव रामकिशन ओझा को नौ सीटों – अहमदाबाद पूर्व, अहमदाबाद पश्चिम, खेड़ा, आनंद, गांधीनगर, मेहसाणा, बनासकांठा, पाटन और साबरकांठा की जिम्मेदारी दी गई है। इस बीच, कर्नाटक से आने वाले एआईसीसी सचिव बी एम संदीप कुमार को भावनगर, अमरेली, सुरेंद्रनगर, राजकोट, जूनागढ़, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ का प्रभार दिया गया है। आंध्र प्रदेश से कुमार की सहयोगी उषा नायडू को शेष सीटों के लिए जिम्मेदारी दी गई है। वह पंचमहल, दाहोद, वडोदरा, छोटा उदेपुर, भरूच, बारडोली, नवसारी, सूरत और वलसाड के लिए उत्तरदायी होंगी।
सीटों का बंटवारा मामला नहीं
विपक्ष के गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) की घटक आम आदमी पार्टी (आप) का बोलना है कि आनें वाले लोकसभा चुनाव के लिए सीटों का बंटवारा कोई बड़ा मामला नहीं है और अक्टूबर में गठबंधन की समिति इस बारे में फैसला करेगी। ‘आप’ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में ‘इंडिया’ गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर कोई फार्मूला तय किए जाने के बारे में पूछे गए एक प्रश्न पर कहा, अभी इस मामले पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। सीटों का बंटवारा कोई बड़ा मामला भी नहीं है।