Indus Water Treaty: सिंधु जल समझौते पर हिंदुस्तान और पाक आमने सामने हैं. हिंदुस्तान ने इस वर्ष की आरंभ में सिंधु जल समझौते को लेकर पाक को एक नोटिस जारी किया था. इसका उत्तर पाक को नहीं सूझ रहा था. अब जाकर पाक ने इस नोटिस पर उत्तर दिया है. 4 महीने के बाद पाक की ओर से इस नोटिस पर प्रतिक्रिया आई है.
सीधे-सीधे उत्तर देने से बची पाक विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने बोला है कि पाक ने सिंधु जल संधि पर भारतीय नोटिस का उत्तर दिया है. मुमताज जहरा ने बोला कि पाक नेक नीयत से इस संधि को लागू करने और अपनी जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि जब उनसे यह पूछा गया कि पाक ने हिंदुस्तान के नोटिस पर क्या उत्तर दिया है. इस पर वह उत्तर को टाल गई. बस इतना बोला कि ‘हमने हिंदुस्तान को उत्तर दिया है. इसके अतिरिक्त मैं कुछ नहीं कह सकती‘.
भारत ने पाक को जारी किया था सिंधु जल के संबंध में नोटिस
भारत ने वर्ष की आरंभ में पाक को एक नोटिस जारी किया था. हिंदुस्तान ने इस नोटिस के माध्यम से सिंधु जल संधि में संशोधन की बात कही थी. 62 वर्ष के इतिहास में यह पहली बार था, जब हिंदुस्तान ने सिंधु जल समझौते में संशोधन की मांग की थी. नोटिस जारी होने के लगभग चार महीने बाद पाक की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आई.
क्या है सिंधु जल समझौता
करीब 62 वर्ष पहले यह संधि तत्कालीन भारतीय पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तानी मिलिट्री जनरल अयूब खान के बीच कराची में सितंबर 1960 में हुई थी. इसी समझौते के अनुसार दोनों राष्ट्रों के बीच सिंधु नदी और उसकी अन्य सहायक नदियों से पानी की आपूर्ति का बंटवारा नियंत्रित किया जाता है. इस संधि के अनुसार सिंधु और उसकी सहायक नदियों से हिंदुस्तान को लगभग 19.5 फीसदी तो पाक को लगभग 80 फीसदी पानी मिलता है. पानी के आवंटित हिस्से का लगभग 90 फीसदी पानी ही हिंदुस्तान इस्तेमाल करता है.
भारत ने क्यों जारी किया था नोटिस
सिंधु जल समझौते के अनुसार सिंधु घाटी की पूर्वी नदियों पर हिंदुस्तान का अधिकार क्षेत्र है, जबकि पश्चिमी नदियों पर पाक का अधिकार है. लेकिन कुछ शर्तों के साथ हिंदुस्तान को पश्चिमी नदियों पर रन ऑफ द रिवर परियोजना के माध्यम से पनबिजली उत्पन्न करने का अधिकार दिया गया है. लेकिन पाक इस पर विरोध जताता है. पाक ने इन आपत्तियों की जांच के लिए 2015 में तटस्थ जानकार की नियुक्ति की मांग की थी, लेकिन 2016 में पाक ने अचानक इस मांग को वापस लेते हुए एक मध्यस्थ न्यायालय की मांग कर दी.