Rajdhani Express News: देश में लोकप्रिय हो रही वंदे हिंदुस्तान ट्रेन की सुविधाएं उसे खास बना देती हैं. अब रेलवे राजधानी एक्सप्रेस में भी बड़ा परिवर्तन करने की तैयारी में है, रिपोर्ट्स बताते हैं कि आने वाले दिनों में भोपाल से चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस समेत 10 राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों को अत्यधिक उन्नत प्रजाति की वंदे हिंदुस्तान स्लीपर ट्रेनों से रिप्लेस करने की योजना बनाई जा रही है. इस कड़ी में रेलवे आवंटन की प्रक्रिया जनवरी में प्रारम्भ कर सकता है. जिसके बाद मार्च के ट्रेनों में असली परिवर्तन को अंजाम दिया जाएगा.
क्या प्लानिंग कर रहा रेलवे?
फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, रेल मंत्रालय ने 2025 तक 100 से अधिक वंदे हिंदुस्तान स्लीपर ट्रेन प्रारम्भ करने का खाका तैयार किया है. इन ट्रेनों में प्रत्येक कोच में एक मिनी पेंट्री के साथ बेहतर सेवाएं होंगी, जिससे यात्रियों को आरामदायक यात्रा का आनंद मिलेगा. अनेक सुविधाओं से लैस प्रत्येक कोच न्यूनतम 51 बर्थ होने की आशा है. शुरुआती चरण में 16 कोचों वाली वंदे हिंदुस्तान स्लीपर ट्रेनों की आरंभ होगी. वहीं चेन्नई और बेंगलुरु राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों को इस तरह बदलने का विचार चल रहा है.
रेलवे ऑफिसरों के अनुसार, वंदे हिंदुस्तान की पहली स्लीपर ट्रेन अगले वर्ष तक इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार हो सकती है. इंटीग्रल कोच फैक्ट्री के महाप्रबंधक बीजी माल्या ने कहा, “हम इस वित्तीय साल के भीतर वंदे का स्लीपर वैरिएंट लॉन्च कर देंगे. हम इसी वित्तीय साल में वंदे मेट्रो भी लॉन्च करेंगे. इसके अलावा, गैर-वातानुकूलित यात्रियों के लिए, जिसे गैर-एसी पुश-पुल ट्रेन बोला जाता है, उसे हम 31 अक्टूबर से पहले लॉन्च करने जा रहे हैं. इसमें 22 कोच और एक लोकोमोटिव होगा.
कब लॉन्च हो सकती है वंदे हिंदुस्तान स्लीपर?
पहली स्लीपर वंदे हिंदुस्तान ट्रेन मार्च 2024 में लॉन्च की जा सकती है, जबकि वंदे मेट्रो ट्रेन को भारतीय रेलवे अगले वर्ष जनवरी में लॉन्च कर सकता है. दोनों नयी प्रकार की वंदे हिंदुस्तान एक्सप्रेस ट्रेनों को चेन्नई में भारतीय रेलवे की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा बनाया जा रहा है.
साल 2019 में पहली वंदे हिंदुस्तान ट्रेन लॉन्च की गई थी, जोकि नयी दिल्ली से वाराणसी के बीच थी. वंदे हिंदुस्तान की सबसे अधिक गति 180 किलोमीटर प्रति घंटे है. हालांकि, सभी ट्रेनों की औसत गति 100 किलोमीटर प्रति घंटे से कम है. इसके पीछे वजह रेलवे ट्रेक का तेज गति के लिए उपयुक्त नहीं होना है. रेलवे तेज गति से रेलवे ट्रैक्स को भी बेहतर बनाने के लिए काम कर रहा है.