चाचा पारसनाथ से पारिवारिक झगड़े के कारण पार्टी गंवाने वाले चिराग पासवान ने 5 में से सभी सीटें जीतकर स्वयं को बिहार की राजनीति में स्थापित कर लिया है. उनकी जीत का तोहफा गवर्नमेंट में उन्हें खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के साथ मिला है. उनके पिता रामविलास पासवान ने भी इस मंत्रालय की लंबे समय तक जिम्मेदारी निभाई थी. राजनीति में चमकता सितारा बनकर उभरने वाले चिराग मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं.
31 अक्टूबर 1982 को जन्मे चिराग पासवान दिवंगत रामविलास पासवान के बेटे हैं, जो एक मशहूर सियासी नेता हैं. वे लोक जनशक्ति पार्टी से जुड़े हैं, जिसकी स्थापना उनके पिता ने की थी. उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में एक प्रमुख सहयोगी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है. चिराग पासवान की शिक्षा की नींव दिल्ली में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) में रखी गई थी, जो नवंबर 1989 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अनुसार एक स्वायत्त संगठन के रूप में स्थापित एक संस्थान है. पासवान का मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री से संक्षिप्त परिचय रोमांटिक कॉमेडी ‘मिले ना मिले हम’ से प्रारम्भ हुआ, जो 4 नवंबर 2011 को रिलीज़ हुई थी.