चंद्रयान-3 मिशन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग की उल्टी गिनती प्रारम्भ हो गई है और कुछ ही घंटों में चंद्रयान-3 अंतरिक्ष में जाकर चंद्रमा की सतह पर उतर जाएगा. इस मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए इसरो द्वारा दिन-रात गहन कोशिश और कड़ी मेहनत की गई है. इसरो अध्यक्ष और चंद्रयान मिशन प्रमुख एस। सोमनाथ का बोलना है कि हम इस मिशन को सफल बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं, यदि यह मिशन सफल होता है और चंद्रयान-3 चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित उतरता है तो यह हिंदुस्तान के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी. चंद्रयान-3 लैंडर का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा तक जाना और चंद्रमा की कक्षा में एक रोवर लॉन्च करना है ताकि चंद्रमा की सतह का अवलोकन किया जा सके.
चंद्रयान-3 मिशन क्या है?
चंद्रयान-3 मिशन को मूल चंद्रयान-2 का उत्तराधिकारी मिशन बोला जा सकता है, इसरो और हिंदुस्तान को आशा है कि चंद्रयान-3 वही काम करेगा जो चंद्रयान-2 ने पूरा नहीं किया. चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर और रोवर को चंद्रयान-2 की तुलना में अधिक मजबूत बनाया गया है, जो ग्रह की खोज के लिए जरूरी है. जबकि चंद्रयान -3 रोवर चंद्रमा की सतह की परिक्रमा करेगा, इसे LVM-3 – M4 लॉन्च गाड़ी द्वारा लॉन्च किया जाएगा.
जानिए पहले दो चंद्रयानों से कितना अलग होगा चंद्रयान-3
एस. सोमनाथ का बोलना है कि चंद्रयान-3 रोवर पिछले दो चंद्रयानों की नकल नहीं होगा. खासकर लोगों को लगता है कि यह चंद्रयान-2 के समान ही तीसरा होगा, लेकिन ऐसा नहीं है, इसकी इंजीनियरिंग बहुत अलग है, यह स्वाभाविक रूप से पहले दो की तुलना में अधिक मजबूत बनाया गया है! इसके इम्पैक्ट लेग्स को मजबूत किया गया है, अंदर लगे उपकरण भी बेहतर और मजबूत हैं. इसका रोवर इतना मजबूत है कि यह चंद्रयान अपने सॉफ्टवेयर के जरिए अंतरिक्ष में अपने लिए घातक स्थान का भी पता लगा सकता है. इस लैंडर में 4 थ्रोटल इंजन हैं।
इस मिशन से क्या हासिल होगा?
अभी तक हिंदुस्तान ने किसी अन्य ग्रह या उपग्रह पर कोई रोवर नहीं उतारा है। हमें आशा है कि चंद्रयान-3 उस सपने को पूरा करेगा. यह मिशन इसरो के कई अन्य प्रमुख मिशनों के लिए भी मार्ग प्रशस्त कर सकता है. अब तक सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन ही चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग में सफल हो पाए हैं. सॉफ्ट लैंडिंग का मतलब है कि आप किसी सैटेलाइट को लैंडर के जरिए दूसरे ग्रह पर सुरक्षित उतारते हैं और वह अपना काम सरलता से कर लेता है. चंद्रयान-2 को भी इसी तरह चंद्रमा पर उतरना था, जो चंद्रयान-3 के अधूरे सपने को पूरा करेगा. अभी तक पूरे विश्व से कुछ ही राष्ट्र इन मिशनों में सफल हो पाए हैं. यदि हमें कामयाबी मिलती है तो हम उन सफल राष्ट्रों की सूची में शामिल हो जायेंगे और इसरो के अथक प्रयास, चंद्रयान-3 की ताकत, हमारे वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत, महीनों का अनुभव, भारी पैसा सब कुछ लिखा जाएगा.