स्वदेशी स्पेस शटल ‘पुष्पक’ (Pushpak) विमान की उड़ान सफल साबित हुई है. ISRO ने फिर से कमाल कर दिखाया है. पुष्पक विमान हिंदुस्तान के रीयूजेबल रॉकेट सेग्मेंट में बड़ी कामयाबी है. इसरो ने इसकी सफल उड़ान की समाचार दी है. कर्नाटक में एक रनवे से इसे आर्मी हेलिकॉप्टर के जरिए उड़ाया गया. विमान को आसमान में 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर ले जाकर छोड़ दिया गया. पुष्पक में पंखों का इस्तेमाल किया गया है. जब हेलिकॉप्टर से इसे छोड़ दिया गया तो यह रनवे पर स्वयं ही लौट आया. इसरो के लिए यह बड़ी कामयाबी है.
टेस्ट फ्लाइट सफल होने के बाद इसरो चीफ एस सोमनाथ ने जानकारी देते हुए बोला कि परिणाम बिल्कुल परफेक्ट और बेहतरीन आया है. पुष्पक रीयूजेबल रॉकेट सेग्मेंट में मील का पत्थर साबित होने वाला है. Pushpak (RLV-TD) मिशन के बारे में ISRO ने कहा कि स्पेस से रॉकेट के ठीक सुरक्षित लौटने में सफलता मिली है. इसमें अप्रोच और हाई गति लैंडिंग का टेस्ट किया गया. Pushpak को भारतीय एयर फोर्स के हेलिकॉप्टर चिनूक के माध्यम से हवा में 4.5 किलोमीटर ऊंचाई पर ले जाया गया. इसे रनवे से 4 किलोमीटर दूर छोड़ गया था. लेकिन पुष्पक स्वयं ही अपनी परफेक्ट स्थान पर लौट आया. यह रनवे पर परफेक्ट स्थान पर आकर एक हॉल्ट पर रुक गया जिसके लिए इसने अपने ब्रेक पैराशूट, लैंडिंग गियर ब्रेक का भी इस्तेमाल किया.
पुष्पक की यह तीसरी टेस्ट फ्लाइट थी जो कि कठिन समय में इसकी रोबोटिक लैंडिंग को लेकर की गई थी. बोला जा रहा है कि पुष्पक को पूरी तरह से काम में लाने में अभी कई वर्षों का समय लग सकता है. पुष्पक का सफल टेस्ट इस बात की पुष्टि करता है कि भविष्य में स्पेश मिशनों में लागत काफी कम हो जाएगी. रॉकेट को बार बार इस्तेमाल में लाया जा सकेगा जिससे कि खर्चा काफी हद तक कम हो जाएगा. इसकी पहली एक्सपेरिमेंटल फ्लाइट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से 2016 में हुई थी. इसने बंगाल की खाड़ी में एक वर्चुअल रनवे पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की थी. इसके बाद यह योजना के अनुसार समुद्र में डूब गया था. इसका दूसरा टेस्ट पिछले साल 2 अप्रैल को चित्रदुर्ग एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज पर हुआ था