Chandigarh University News: चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की एक लड़की पर कई विद्यार्थियों का वीडियो बना कर उसे वायरल करने का आरोप लगा है। पुलिस ने इस मुद्दे में आरोपी लड़की समेत तीन लोगों को अरैस्ट किया है। मोहाली के खरड़ की एक न्यायालय ने मंगलवार को छात्रा समेत तीनों आरोपियों को सात दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
इस मुद्दे के सामने आने के बाद से यह यूनिवर्सिटी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इसके फाउंडर कौन है। हम आपको आज चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के संस्थापक के बारे में बताएंगे।
सतनाम सिंघ संधू हैं संस्थापक
सतनाम सिंह संधू इसके फाउंडर हैं। वह चंडीगढ़ वेलफेयर ट्रस्ट (सीडब्ल्यूटी) और न्यू इण्डिया डिवेलपमेंट (एनआईडी) फाउंडेशन के संरक्षक भी हैं। संधू सामाजिक कार्यों में काफी सक्रिय रहते हैं। पंजाब के फिरोजपुर में एक छोटे से गांव रसूलपुर संधू का जन्म हुआ था। उनके पिता एक किसान थे इसलिए वह स्वयं भी एक किसान बने। संधू ने 2001 में शिक्षा क्षेत्र में कदम रखा था। उन्होंने सबसे पहले मोहाली के लांडरां में चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज (सीजीसी) की स्थापना की थी।
मीडिया से वार्ता में संधू ने कई बार इस बात का जिक्र किया है कि वह बचपन में जिस विद्यालय में पढ़ाई करते थे उसकी हालत बहुत खराब थी। विद्यालय में कोई क्लास नहीं थी और पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई होती थी। विद्यार्थी बैठने के लिए घर से टाट-पट्टियां लाया करते थे।
संधू का बोलना है कि उन्होंन बहुत अधिक पढ़ाई नहीं की है। वह बताते हैं कि उनके पिता और दादा उन्हें अखबार के संपादकीय पढ़ाते थे। यहीं से उनके मन में शिक्षा के क्षेत्र में कुछ करने की ठानी। संधू ने दक्षिण हिंदुस्तान के कई प्राइवेट इंजिनियरिंग संस्थानों में गए। इन संस्थानों को देखकर उन्हें ख्याल आया कि पंजाब में अच्छे एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बनाने की जरुरत है।
संधू ने दिसंबर 2000 में उन्होंने 95 लाख रुपये का लोन लिया और चंडीगढ़ से सटे खरड़ के लांडरां में तीन एकड़ जमीन पर एक इंजिनियरिंग कॉलेज बनाया। यह कॉलेज चल निकला और फिर 2012 में उन्होंने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की स्थापना की।
वैस एमएमएस काण्ड से पहले भी चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी एक टकराव में घिर चुकी है। जब पंजाब यूनिवर्सिटी की एक उपसमिति ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के नाम पर विरोध जताई थी। उपसमिति का बोलना था कि ऑफिसरों की अनुमति के बिना एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी निजी उद्देश्यों के लिए राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के नामों का उपयोग नहीं कर सकती है।