इंदौर न्यूज़ डेस्क .. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भले ही स्वयं को गैर-राजनीतिक संगठन कहता हो, लेकिन एमपी में लोकसभा चुनाव के नतीजों में उसकी सियासी ताकत एक बार फिर नजर आई. मध्य प्रदेश में संघ ने गवर्नमेंट और संगठन के साथ मिलकर ऐसा काम किया कि भाजपा ने राज्य की सभी 29 में से सभी 29 सीटें जीत लीं। यहां तक कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे कद्दावर कांग्रेसी नेता भी यहां अपना गढ़ नहीं बचा सके। आजादी के बाद यह पहली बार है कि भाजपा ने मध्य प्रदेश में पूरी तरह से क्लीन स्वीप किया है।
मध्य प्रदेश में 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माइक्रोमैनेजमेंट से जोड़ा गया था। दरअसल, 2018 के विधानसभा चुनाव में संघ ने सीधे तौर पर हस्तक्षेप नहीं किया था। जिसके चलते भाजपा को मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सत्ता गंवानी पड़ी। उस समय मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की कमलनाथ गवर्नमेंट भी बनी थी। इसके बाद 2023 के चुनाव में संघ ने कमान संभाली और पिछले चुनाव की कमियों पर काम किया। वहीं चुनाव में जीत के बाद संघ ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति बनानी प्रारम्भ कर दी थी। संघ की ये मेहनत भी रंग लाई और इस बार भाजपा ने राज्य में बड़ी जीत दर्ज की।