नेपाली परराष्ट्र मंत्रालय के गलियारे इन दिनों गरम हैं. सिंह दरबार काठमांडू स्थित परराष्ट्र मंत्रालय से नई दिल्ली में तैनात नेपाली राजदूत डाक्टर शंकर प्रसाद शर्मा को संदेश गया है कि वह भारतीय संसद में बनाये उस भित्ति चित्र में संशोधन कराने का कोशिश करें, जिसमें अखंड हिंदुस्तान का नक्शा उकेरा गया है. उस विवादित भित्ति चित्र में नेपाल के लुंबिनी-कपिलवस्तु समेत कुछ इलाकों को हिंदुस्तान का हिस्सा दर्शाया गया है. पीएम प्रचंड जुलाई में चीन जाएंगे, उससे पहले नक्शे को लेकर असहमति दर्शाने के पीछे कूटनीतिक निहितार्थ यह भी है कि नेपाली कम्युनिस्ट नेता नई दिल्ली की गोद में बिल्कुल से नहीं बैठ गये हैं. नाम न बताने की शर्त पर नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास के एक कूटनीतिक ने नये निर्देश का खुलासा किया है.
हालांकि, 8 जून 2023 को भारतीय विदेशमंत्री एस। जयशंकर ने इस भित्ति चित्र के हवाले से यह साफ कर दिया था कि यह सम्राट अशोक के समय वाले अखंड हिंदुस्तान का नक्शा है, जिसमें मौर्य साम्राज्य के विस्तार को चित्रित किया गया था. उन्होंने कहा, ‘आप भूल जाइये पाक को, वह इसे समझने की हालत में नहीं है.‘
प्रधानमंत्री प्रचंड 31 मई से 3 जून 2023 की यात्रा में जब हिंदुस्तान आये थे, तब पूर्व पीएम बाबुराम भट्टराई ने इस नई संसद की दीवार पर बने नक्शे को लेकर सबसे पहले विरोध पंजीकृत की थी. राजकीय यात्रा के समय प्रचंड ने अपने भारतीय समकक्ष से इस बात की चर्चा नहीं की, मगर उन्होंने नेपाली दूतावास के ऑफिसरों से इसका ब्योरा मांगा था. प्रचंड के लौटने के बाद नेपाल के दूसरे पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली ने भी इसे एजेंडा बना लिया, और नक्शे के मामले को नेपाली अस्मिता, संप्रभुता और भू-सामरिक स्थिति में हस्तक्षेप से जोड़ दिया. पर्दे के पीछे से इस मुद्दे पर पेट्रोल डालने में काठमांडू स्थित चीनी दूतावास भी एक्टिव रहा है.
नहीं हुए संतुष्ट, दोबारा मांगी रिपोर्ट
हालांकि, नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास ने अपने मंत्रालय और पीएम कार्यालय को रिपोर्ट भेज दी थी कि भारतीय संसद में जो भित्ति चित्र उकेरा गया है, उसका संबंध प्राचीन हिंदुस्तान से है, लेकिन संभवतः उस रिपोर्ट से नेपाली सत्ता का गलियारा संतुष्ट नहीं हुआ है. मंगलवार को नेपाल के विदेश मंत्री नारायण प्रकाश सऊद ने विदेश मामलों की संसदीय समिति से वार्ता में बोला कि हमने भारतीय संसद के भित्तिचित्र को गंभीरता से लिया है, और अपने दूतावास से उसके बारे में रिपोर्ट मांगी है. नेपाली विदेश मंत्री एनपी सऊद ने यह नहीं साफ किया कि दूतावास से रिपोर्ट वह दोबारा क्यों मांग रहे हैं? विदेश मामलों की संसदीय समिति मंत्री एनपी सऊद यह भी जानकारी दे रहे थे, ’13 जून, 2020 को संसद में संशोधन के ज़रिये हमने नेपाल का जो नक्शा अपडेट किया था, उसमें हमने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की अद्यतन स्थिति को भी साफ किया है.’
काठमांडू के मेयर ने टांगा ‘ग्रेटर नेपाल’ का नक्शा
सबसे दिलचस्प यह है कि हाल में हिंदी फ़िल्मों पर रोक लगाने वाले काठमांडू के मेयर बालेन्द्र शाह ने अपने कार्यालय में ग्रेटर नेपाल का नक्शा टांग दिया है, जिसमें 4 मार्च 1816 को अनुमोदित सुगौली संधि से पहले हिंदुस्तान के जो क्षेत्र नेपाल का हिस्सा हुआ करते थे, उसे दर्शाया गया है. ग्रेटर नेपाल के उस नक्शे में सिक्किम समेत गढ़वाल-कुमाऊं के कुछ हिस्से को नेपाली क्षेत्र में बताया गया है. काठमांडू के मेयर बालेन्द्र शाह राष्ट्रवाद के नाम पर क्या भारत-नेपाल के संबंधों में किरकिरी पैदा करना चाहते हैं? इस प्रश्न पर संवैधानिक मामलों के जानकार बिपिन अधिकारी ने बोला कि जो मानचित्र नेपाली संसद द्वारा एप्रूव्ड है, उसका ही उपयोग निर्वाचित प्रतिनिधि को करना चाहिए.