नई दिल्ली : हिंदुस्तान की राजधानी दिल्ली में लोगों को सांस लेना भी कठिन है। यहां की वायु गुणवत्ता इतनी गंभीर हो गई है कि अब तो जहरीली धुंध की चादर से लोगों का दम घुटने लगा है। मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर आसमान में छाई जहरीली धुंध की चादर बुधवार को और घनी हो गई और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच हवा की गुणवत्ता एक बार फिर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई।
दिल्ली का एक्यूआई 401
रिपोर्ट में बोला गया है कि दिल्ली में हर रोज शाम चार बजे दर्ज किया जाने वाला पिछले 24 घंटे के दौरान का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 401 रहा। मंगलवार को यह 397 था। एक्यूआई सोमवार को 358 और रविवार को 218, शनिवार को 220, शुक्रवार को 279 और बृहस्पतिवार को 437 था। इसके साथ ही, पड़ोसी शहर गाजियाबाद (एक्यूआई 378), गुरुग्राम (297), ग्रेटर नोएडा (338), नोएडा (360) और फरीदाबाद (390) में भी वायु गुणवत्ता बहुत खराब दर्ज की गई। बता दें कि शून्य से 50 के बीच एक्यूआई ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’, 401 से 450 के बीच ‘गंभीर’ और 450 से ऊपर ‘अत्यधिक गंभीर’ माना जाता है।
सरकार के तरीका नहीं आ रहे काम
दिल्ली गवर्नमेंट द्वारा प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण कार्य और शहर में डीजल से चलने ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध सहित कई कड़े कदम उठाने के बावजूद पिछले कुछ दिनों में दिल्ली की वायु गुणवत्ता में गिरावट आई है। वायु गुणवत्ता की नज़र में विशेषज्ञता रखने वाली स्विस कंपनी आईक्यूएयर के मुताबिक, मंगलवार को दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में दिल्ली पहले जगह पर, ढाका दूसरे, लाहौर तीसरे और मुंबई चौथे जगह पर थी।
पराली जलाने से भी हवा हो रही खराब
प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों के सहयोग की पहचान करने के लिए पुणे स्थित भारतीय ऊष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान द्वारा विकसित एक प्रणाली के अनुसार, बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण में पराली जलाने की घटनाओं की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत थी। गुरुवार को इसके 11 प्रतिशत और शुक्रवार को चार प्रतिशत रहने का अनुमान है। आंकड़ों से यह भी पता चला कि दिल्ली में प्रदूषण के एक अन्य प्रमुख कारण परिवहन ने पिछले कुछ दिनों में दिल्ली की खराब हवा में 12 से 15 फीसदी का सहयोग दिया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के विश्लेषण के मुताबिक दिल्ली में एक से 15 नवंबर तक प्रदूषण चरम पर होता है, जब पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या बढ़ जाती है बुधवार को पंजाब में पराली जलाने की 2,544 घटनाएं दर्ज की गईं, जिससे 15 सितंबर के बाद से इस तरह की घटनाओं की संख्या 30,661 हो गई है। दिल्ली की वायु गुणवत्ता दुनिया के राजधानी शहरों में सबसे खराब है।
केंद्र गवर्नमेंट की जीआरएपी रहेगी जारी
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के एक अधिकारी ने बोला कि केंद्र गवर्नमेंट की वायु प्रदूषण नियंत्रण योजना का आखिरी चरण अगले आदेश तक जारी रहेगा। इसे क्रमिक प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) कहते हैं। इसके अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में निर्माण कार्य और प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध सहित कड़े कदम उठाए गए हैं।
सरकारी वाहनों का परिचालन होगा कम
इस सप्ताह की आरंभ में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बोला था कि यदि एक्यूआई 400 का आंकड़ा पार करता है, तो दिल्ली गवर्नमेंट वाहनों के परिचालन को सीमित करने से संबंधित सम-विषम योजना लागू कर सकती है। शुक्रवार को बारिश के कारण दिल्ली की वायु गुणवत्ता में गौरतलब सुधार के बाद गवर्नमेंट ने पिछले हफ्ते ऑड-इवन योजना के कार्यान्वयन को स्थगित कर दिया था। योजना के अनुसार कारों को उनके पंजीकरण संख्या के ऑड या इवन आखिरी अंक के आधार पर वैकल्पिक दिनों में संचालित करने की अनुमति दी जाती है।
सांस में घुल रहा जहरीला धुंआ
चिकित्सकों का बोलना है कि दिल्ली की प्रदूषित हवा में सांस लेना एक दिन में लगभग 10 सिगरेट पीने के नुकसानदायक प्रभावों के बराबर है। उन्होंने बोला कि लंबे समय तक उच्च स्तर के प्रदूषण के संपर्क में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और श्वसन संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं या बढ़ सकती हैं और दिल बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। गाड़ी उत्सर्जन, धान-पुआल जलाने, पटाखे और अन्य क्षेत्रीय प्रदूषण स्रोतों के साथ प्रतिकूल मौसम संबंधी स्थितियां, सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में घातक वायु गुणवत्ता स्तर में सहयोग करती हैं। अगस्त में शिकागो यूनिवर्सिटी में ऊर्जा नीति संस्थान (ईपीआईसी) द्वारा संकलित एक रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण दिल्ली में लोगों की उम्र लगभग 12 वर्ष कम कर रहा है।