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लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी पर हिंदुस्तान और चीन के बीच गजब का तनाव है और इस तनाव के बीच दोनों राष्ट्रों के संबंध संकट के दौर से गुजर रहे हैं. तनाव को कम करने की प्रयास दोनों तरफ से सेना स्तर पर हुई. लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि चीन की तरफ से आधिकारिक स्तर पर राजनयिक स्तर पर हालात को सुधारने की प्रयास हो रही है. गलवान में इंडियन आर्मी और चीनी सेना के बीच झड़प के बाद से हिंदुस्तान और चीन के संबंध सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं. इस एनकाउंटर के बाद हिंदुस्तान में 59 चीनी एप्स को बैन किया गया. हिंदुस्तान लगातार चीन पर अपनी निर्भरता को घटाने में लगा हुआ है. इन सब के बीचचीन हिंदुस्तान में जी-20 सम्मेलन में शामिल नहीं हुआ. चीन ने 18 महीने से अपने राजदूत कि नियुक्त हिंदुस्तान में नहीं की. हिंदुस्तान में चीनी एबेंसी खाली पड़ी थी. इन सब के बीच अब चीन और हिंदुस्तान में वार्ता का कोई दौर नहीं रहा तो तनाव को कम करने के लिए चीन ने अपने राजदूत की नियुक्ति कर दी. वो भी तब जब चीन की तरफ से हिंदुस्तान के एक राज्य अरुणाचल प्रदेश को लेकर अपना दावा जताया था. इससे भी हिंदुस्तान खफा है.
18 महीने बाद हिंदुस्तान में चीनी राजदूत
भारत में चीन के नये राजदूत शू फेइहोंग दिल्ली पहुंच गए हैं. हिंदुस्तान में चीन के राजदूत का पद करीब 18 महीने से खाली था, जो चार दशकों में सबसे लंबा अंतराल है. शू ने बोला कि चीन एक-दूसरे की चिंताओं को समझने और वार्ता के माध्यम से विशिष्ट मुद्दों का पारस्परिक रूप से स्वीकार्य निवारण खोजने के लिए हिंदुस्तान के साथ काम करने को तैयार है. उन्होंने पूर्वी लद्दाख में लंबे समय से जारी सेना गतिरोध के बीच यह बात कही है.