देश के पूर्व पीएम और किसानों के देवदुत चौधरी चरण सिंह को सर्वोच्च सम्मान हिंदुस्तान रत्न से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मरणोपरांत चौधरी चरण सिंह को हिंदुस्तान रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया है।बता दें कि नयी दिल्ली में हुए कार्यक्रम में चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी ने ये सम्मान ग्रहण किया है।चौधरी चरण सिंह को सम्मान मिलने पर भाजपा के कद्दावर नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है।
मसीहा चौधरी चरण सिंह का जन्म 1902 में यूपी के मेरठ जिले के नूरपुर में एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने 1923 में विज्ञान से ग्रेजुएट होने के बाद 1925 में आगरा यूनिवर्सिटी से मास्टर की डिग्री ली थी।इसके बाद वो सबसे पहले 1937 में छपरौली से यूपी विधानसभा के लिए चुने गए बाद में वर्ष 1946, 1952, 1962 और 1967 में विधानसभा में अपने निर्वाचन क्षेत्र का अगुवाई किया।
इसके बाद कांग्रेस पार्टी के विभाजन के बाद फरवरी 1970 में कांग्रेस पार्टी पार्टी के समर्थन से दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन 2 अक्टूबर 1970 से उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया था। 1974 में उन्होंने लोकदल का गठन किया, जिसमें भारतीय क्रांति दल, स्वतंत्र पार्टी के कुछ सदस्य, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, किसान मजदूर पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल जैसे कई दल शामिल थे।उस समय वे राष्ट्र में आपातकाल लागू होने के चलते कारावास में थे.1979 में वित्त मंत्री और उप पीएम के रूप में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की स्थापना की थी। 28 जुलाई 1979 को चौधरी चरण सिंह समाजवादी पार्टियों तथा कांग्रेस पार्टी यू के समर्थन से पीएम पद की शपथ लेकर राष्ट्र की बागडोर संभाली थी…कड़क नेता के तौर पर चौधरी चरण सिंह पहचाने जाते थे|