पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाले राष्ट्र की तैयारी प्रक्रिया पर चर्चा करने के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ 5 दिसंबर को पीएम मोदी की ओर से बुलाई गई बैठक में भाग लेंगी. राज्य सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक, सीएम इस अवसर पर पीएम के साथ एक अलग बैठक करने के लिए नयी दिल्ली की अपनी यात्रा के मौके का उपयोग कर सकती हैं, जहां वह पश्चिम बंगाल गवर्नमेंट के लंबित केंद्रीय बकाए की मांगों को फिर से उठा सकती हैं.
हालांकि, अलग से बैठक होगी या नहीं, इस पर अभी तक राज्य सचिवालय में कोई पुष्टि नहीं हुई है. कुछ महीने पहले ममता बनर्जी नयी दिल्ली गई थीं, उन्होंने अपने समकक्ष अरविंद केजरीवाल के साथ एक अलग बैठक की और उनसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अनुसार माल और सेवा कर में राज्य की हिस्सेदारी और लंबित रकम के अनुसार दो प्रमुखों के अनुसार लंबित केंद्रीय बकाया राशि का निवेदन किया.
मनरेगा के कारण राज्य का बकाया अभी भी लंबित
इस बीच, केंद्र ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं के अनुसार धन जारी कर दिया है. मनरेगा के कारण राज्य का बकाया अभी भी लंबित है. हाल ही में एक जनसभा में सीएम ने भी इस मुद्दे में अपनी कम्पलेन रखी थी और प्रश्न किया था कि क्या अब उन्हें केंद्रीय कोष के लिए पीएम के पैर छूने पड़ेंगे. राज्य सचिवालय के सूत्रों ने बोला कि पश्चिम बंगाल गवर्नमेंट की भी GST में राज्य की हिस्सेदारी के फार्मूले के बारे में कुछ टिप्पणियां थीं, जिसे वह लंबे समय से लंबित GST परिषद की बैठक के कारण नहीं उठा सकीं. राज्य के पूर्व वित्त मंत्री और राज्य गवर्नमेंट के वर्तमान मुख्य आर्थिक सलाहकार, अमित मित्रा ने हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखा था.
अगर मुख्यमंत्री ममता को अलग से पीएम से मिलने का मौका मिलता है, तो सीएम बैठक में यह मामला भी उठा सकती हैं. उनके पीएम को गंगा नदी के कटाव से अवगत कराने की भी आशा है, जो पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में कहर बरपा रही है. सीएम ने हाल ही में पीएम को पत्र लिखकर मुद्दे के स्थायी निवारण के लिए उनके हस्तक्षेप की मांग की है.