पूर्व नौकरशाहों ने प्रधानमंत्री को लिखे खुले खत में भारतीय जनता पार्टी की सरकारों में नफरत की राजनीति ज्यादा होने की बात कही है। पूर्व नौकरशाहों ने कहा कि ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के इस वर्ष में प्रधानमंत्री को किसी भी तरह के ‘पक्षपातपूर्ण विचारों’ से ऊपर उठकर इस तरह की राजनीति को रोकना चाहिए। प्रधानमंत्री के इस पर चुप रहने को पत्र में बड़ा खतरा कहा गया है।
चिट्ठी में कहा गया है कि हम देश में नफरत की राजनीति की एक आंधी देख रहे हैं, जिससे ना सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय बल्कि संविधान को भी चोट पहुंचाई जा रही है। चिट्ठी में विशेष तौर पर भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने और हिंसा बढ़ने को लेकर भी प्रधानमंत्री से ध्यान देने को कहा गया है।
चिट्ठी पर कुल 108 पूर्व नौकरशाहों ने दस्तखत किए हैं। इस चिट्ठी पर पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) शिवशंकर मेनन, पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह, पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई, दिल्ली के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के प्रमुख सचिव टीकेए नायर के भी हस्ताक्षर हैं।