पीएम मोदी ने शुक्रवार को सतत विकास के लिए ऊर्जा पर वेबिनार में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि ऊर्जा और सतत विकास हमारी पुरातन परंपराओं से प्रेरित है और भविष्य की जरूरतओं तथा आकांक्षाओं की पूर्ति का मार्ग है. हिंदुस्तान का साफ विजन है कि सतत विकास सतत ऊर्जा से ही संभव है.
उन्होंने कहा कि टिकाऊ ऊर्जा से ही हिंदुस्तान का सतत विकास संभव है. शून्य राष्ट्र बनने का वादा किया है. हमने लाइफ मिशन- लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट को भी आगे रखा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2030 तक हमारा लक्ष्य गैर-जीवाश्म साधनों द्वारा अपनी स्थापित ऊर्जा क्षमता का 50 फीसदी प्राप्त करना है. हिंदुस्तान ने अपने लिए कुछ लक्ष्य निर्धारित किए हैं और हम उन्हें मौकाों के रूप में देखते हैं. हिंदुस्तान पिछले कुछ सालों में उसी दृष्टि से उस सड़क पर आगे बढ़ा है. इस साल के बजट में उच्च दक्षता वाले सौर मॉड्यूल निर्माण के लिए 19,500 करोड़ रुपए की घोषणा की गई है. हमने देशीय हाइड्रोजन मिशन की भी घोषणा की है.
उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र उर्वरकों, रिफाइनरियों और परिवहन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें हिंदुस्तान की क्षमता का पूर्ण उपयोग करने के लिए प्राइवेट सेक्टर को नवाचार करना चाहिए. अक्षय ऊर्जा के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण भी एक बड़ी चुनौती है. हमने भंडारण क्षमता को भी बड़ी प्राथमिकता दी है. इस वर्ष के बजट में हमने बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी और इंटर-ऑपरेबिलिटी मानकों के लिए प्रावधान किए हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्थिरता के लिए ऊर्जा की बचत और उत्पादन समान रूप से जरूरी है. हमें यहां हिंदुस्तान में अधिक ऊर्जा-कुशल एसी, हीटर, गीजर और इसी तरह के उपकरणों के निर्माण के लिए बहुत कुछ करने की आवश्यकता है. एलईडी बल्ब की मूल्य 300-400 रुपए हुआ करती थी. हमारी गवर्नमेंट ने इसका उत्पादन बढ़ाया, जिससे लागत कम हुई. हमने उजाला के अनुसार लगभग 37 करोड़ एलईडी बल्ब वितरित किए हैं, जिससे बहुत सारी बिजली, गरीबों के लिए पैसा और कार्बन उत्सर्जन की बचत हुई है.
उन्होंने कहा कि हमने कोयला गैसीकरण के लिए चार पायलट परियोजनाओं की योजना बनाई है और इस क्षेत्र में भी नवाचार की आवश्यकता है. इथेनॉल सम्मिश्रण को भी बढ़ावा दिया गया है. हमें अपनी चाइनाी मिलों और डिस्टिलरीज को आधुनिक बनाने की आवश्यकता है.