नयी दिल्ली, 30 मार्च (एजेंसी)
उच्चतम न्यायालय ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की विशेष जाँच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही जाँच की निगरानी कर रहे एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की दो रिपोर्ट पर यूपी गवर्नमेंट से उत्तर मांगा है. रिपोर्ट में केन्द्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे एवं मामले में इल्जामी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने की मांग की गई है. चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की एक पीठ ने कहा कि जाँच की निगरानी कर रहे सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा अजय मिश्रा को दी गई जमानत रद्द करने के लिए प्रदेश गवर्नमेंट को पत्र लिखा है. पीठ ने कहा, ‘एसआईटी ने यूपी गवर्नमेंट के अलावा मुख्य हकीकतिव (गृह) को जाँच की निगरानी कर रहे न्यायाधीश के दो पत्र भेजे हैं, जिन्होंने मुख्य इल्जामी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के वास्ते प्रदेश गवर्नमेंट को उच्चतम न्यायालय में अपील पंजीकृत करने के लिए भी पत्र लिखा है.‘ प्रदेश गवर्नमेंट की ओर से वरिष्ठ अधिसमया महेश जेठमलानी ने शीर्ष न्यायालय को बताया कि अलावा गृह हकीकतिव ने कहा है कि उन्हें पत्र अभी मिले नहीं हैं. पीठ ने उनसे एसआईटी की रिपोर्ट पर गौर करने और 4 अप्रैल तक रुख साफ करने का आदेश दिया. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिसमया दुष्यंत दवे ने कहा कि यूपी गवर्नमेंट ने दावा किया है कि उसने हाई कोर्ट में जमानत का विरोध किया था. उन्होंने कहा, ‘ऐसी हालातयों में जमानत रद्द कर दी जाए, क्योंकि हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते समय आवश्यक कानूनी पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया.‘