मुंबई. लाउडस्पीकर टकराव को लेकर महादेश गवर्नमेंट कठोर नजर आ रही है. ऐसे में महादेश गवर्नमेंट ने फैसला किया है कि किसी भी धार्मिक स्थल पर लाउडस्पीकर लगाने से पहले प्रशासन से अनुमति लेना जरूरी होगा. जिसका मतलब साफ है कि बिना किसी अनुमति के लाउजस्पीकर को नहीं बजाया जा सकता है.
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, लाउडस्पीकर मामले को लेकर महादेश के गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल पुलिस महानिदेसंदेह के साथ बैठक की है. इससे पहले दिलीप वालसे पाटिल ने बताया कि सार्वजनिक जगहों पर लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल को लेकर अगले 1-2 दिनों में दिशा-निर्राष्ट्र जारी कर दिए जाएंगे.
समाचार एजेंसी एएनआई ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के हवाले से बताया कि हम राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बनाए हुए हैं. राज्य में शांति भंग करने की प्रयास करने वालों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी.
इस बीच नासिक पुलिस कमिश्नर ने एक आदेश जारी कर लाउडस्पीकरों की अनुमति लेना जरूरी कर दिया है. उन्होंने आदेश में कहा कि लिखित अनुमति मिलने के बाद ही लाउडस्पीकर लगाए जा सकेंगे. ऐसे में यदि बिनी अनुमति के कोई लाउडस्पीकर लगाता है तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी. नासिक पुलिस कमिश्नर दीपक पांडे ने बताया कि लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा या भजन बजाने की अनुमति लेनी होगी और अज़ान से पहले और बाद में 15 मिनट के भीतर इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मस्जिद के 100 मीटर के पंजीकृते में इसकी अनुमति नहीं होगी. इस आदेश का उद्राष्ट्र्य कानून और व्यवस्था बनाए रखना है.
ठाकरे ने गवर्नमेंट को दिया अल्टीमेटम
लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर टकराव उस समय गर्मा गया जब मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने महादेश गवर्नमेंट को 3 मई तक का अल्टीमेटम देते हुए मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने की मांग की. उन्होंने कहा था कि यदि महादेश गवर्नमेंट ने 3 मई से पहले मस्जिदों से लाउडस्पीकर नहीं हटाए तो मनसे कार्यकर्ता मस्जिदों के सामने हनुमान चालीसा बजाएंगे. यह धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दा है क्योंकि लाउडस्पीकर से सभी को परेशानी होती है.