भक्तिभाव में डूबे लोग भजन गाते हुए संगम तक गए, डुबकी लगाई और वापस चले गए. महाकुंभ को एक महीना पूरा हो गया और केवल तीस दिनों में पचास करोड़ लोग महाकुंभ में डुबकी लगा चुके हैं. यह संख्या हिंदुस्तान और चीन को छोड़कर दुनिया के किसी भी राष्ट्र की जनसंख्या से अधिक है. दुनिया के 119 राष्ट्रों की जनसंख्या को जोड़ दिया जाए तो पचास करोड़ होती है, यानि अब तक महाकुंभ में 119 राष्ट्रों की जनसंख्या के बराबर लोग डुबकी लगा चुके हैं. ये अकल्पनीय, अविश्वसनीय, अद्भुत है.
मौनी अमावस्या के दिन हुए हादसे के बाद माघी पूर्णिमा के अमृत स्नान को लेकर तमाम तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं. योगी आदित्यनाथ की गवर्नमेंट और प्रशासन के लिए दिन बहुत चुनौती पूर्ण था लेकिन इस चुनौती का योगी ने सफलतापूर्वक सामना किया. प्रयागराज से जो फोटोज़ आईं वो आश्चर्यचकित करने वाली थीं, शहर के बाहर किसी हाईवे पर जाम नहीं था, शहर में ट्रैफिक पूरी तरह ठीक चल रहा था.
आप ये जानकर दंग होंगे कि सुबह चार बजे से दस बजे के बीच केवल छह घंटे में एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे. इसके बाद अगले छह घंटे में 87 लाख लोगों ने डुबकी लगाई. शाम चार बजे तक एक करोड़ 87 लाख लोगों ने गंगा स्नान किया. वैसे माघी पूर्णिमा का स्नान माघ के महीने का आखिरी स्नान होता है, इसके बाद ज्यादातर कल्पवासी संगम क्षेत्र से वापस चले जाते हैं, इसलिए संगम में भीड़ अधिक थी.
किसी तरह का कोई दुर्घटना न हो, इसलिए पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारी सुबह से ही अलर्ट थे. योगी आदित्यनाथ सुबह चार बजे लखनऊ में सीएम आवास में बने वॉर रूम में पहुंच गए. वॉर रूम में लगे सीसीटीवी कैमरों की सीधी फोटोज़ आ रही थीं. योगी उसकी मॉनीटरिंग कर रहे थे. डीजीपी प्रशांत कुमार, प्रमुख गृह सचिव संजय प्रसाद और कई सीनियर अधिकारी भी वॉर रूम में उपस्थित थे. दिन के ग्यारह बजे तक जब सब कुछ ठीक से चलता रहा, तब योगी सीएम आवास से निकले. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत में जयन्त चौधरी के साथ एक रैली थी. य़ोगी ने रैली में उपस्थित लोगों से देरी के लिए माफी मांगी. योगी ने बोला कि उन्हें महाकुंभ में माघी पूर्णिमा के स्नान की चिंता थी, इसलिए वह प्रयागराज की व्यवस्थाओं को स्वयं मॉनीटर कर रहे थे. जब उन्हें भरोसा हो गया कि सब कुछ सुचारू ढंग से चल रहा है, इसके बाद ही वह बागपत पहुंचे हैं. योगी ने बिना नाम लिए अखिलेश यादव पर वार किया, बोला कि कुछ लोग श्रद्धालुओं को डरा रहे हैं, अफवाहें फैला रहे हैं, जिससे महाकुंभ में लोग न जाएं, अब जनता सब जानती है, जो लोग स्वयं चोरी-छिपे संगम में डुबकी लगाते हैं, उनकी बात आम लोग कहां सुनने वाले.
महाकुंभ को लेकर योगी के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, अमृत स्नान के दिन कोई हादसा ना हो. इतनी बड़ी संख्या में लोगों को मैनेज करना आसान काम नहीं था. लेकिन जिस तरह से व्यवस्था किया गया उसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. हालांकि इससे निकली दूसरी चुनौती ये है कि जब अच्छा व्यवस्था होता है तो उसकी चर्चा होती है, जब लोग टीवी पर भक्तों को उत्साह से डुबकी लगाते हुए देखते हैं, तो और अधिक श्रद्धालु कुंभ की तरफ रवाना हो जाते हैं.
तीसरा चुनौती ये है कि महाकुंभ से लौटते समय लोग अयोध्या में रामलला के दर्शन करना चाहते हैं, नए मंदिर को देखना चाहते हैं. काशी में बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेना चाहते हैं. इसीलिए अयोध्या और काशी में भी पुलिस फोर्स की आवश्यकता पड़ती है. इन इलाकों में भी लोगों के खाने पीने का इंतजाम, रहने की प्रबंध और साफ सफाई एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है. इसके बाद चुनौती आती है, सियासी बयानबाजी की. मौनी अमावस्या के समय जो दुखद दुर्घटना हुआ, उसके बाद किसी ने इल्जाम लगाया कि हजारों लोग मारे गए. किसी ने बोला कि व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गया. सबसे अधिक गुनाह दिया गया ‘वीआईपी कल्चर’ को. लेकिन इल्जाम लगाने वाले नेता भी चुपचाप कुंभ में डुबकी लगा आए.
बुधवार को दिग्विजय सिंह पुण्य कमाने गए थे. कुछ दिन पहले अखिलेश यादव भी कुंभ में डुबकी लगाकर लौटे हैं. दोनों ने माना कि वो आम आदमी की तरह गए उन्हें कोई कठिनाई नहीं हुई. योगी आदित्यनाथ ने न सिर्फ़ अपने विरोधियों को करारा उत्तर दिया, बल्कि अपनी व्यवस्था कुशलता से ये साबित कर दिया कि अखिलेश यादव जैसे नेता जो इल्जाम लगा रहे थे, उनमें कोई दम नहीं है. महाकुंभ में 50 करोड़ लोगों के स्नान की कुशल प्रबंध करके योगी ने कमाल का काम किया है, अपनी प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण दिया है और इसके लिए उनकी प्रशंसा होनी चाहिए.