अगले वर्ष यानी 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं. उससे पहले बीजेपी को रोकने के लिए अनेक विपक्षी दल जहां एक साथ आने की कवायद में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में इतिहास रचने के लिए नयी रणनीति तैयार कर ली है. अपनी भविष्य की रणनीति के क्रम में बीजेपी सिर्फ सवर्णों ही नहीं, बल्कि पिछड़ों और दलितों के साथ ही मुसलमान समुदाय को अपने पाले में लाने की कोशिशों में लगी है. मुसलमानों में भी बीजेपी का फोकस पसमांदा मुस्लिमों पर है. स्वयं प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी भी पसमांदा मुसलमानों के बीच पार्टी की पैठ बढ़ाने पर जोर दे चुके हैं. हाल ही में बीजेपी ने कई ऐसे काम किए हैं जो उसकी इस मंशा को साफ उजागर करते हैं. हम आपको बताएंगे कि राष्ट्र में किन राज्यों में सबसे अधिक पसमांदा मुस्लिम हैं और पसमांदा में कितनी जातियां शामिल हैं और इनके साथ आने से बीजेपी को कितना लाभ होगा…
कौन हैं पसमांदा मुसलमान?
हिंदुस्तान में रहने वाले मुसलमानों में 15 प्रतिशत उच्च वर्ग के माने जाते हैं. जिन्हें अशरफ कहते हैं. इनके अतिरिक्त बाकि 85 प्रतिशत अरजाल, अजलाफ मुसलमान पिछड़े हैं. इन्हें पसमांदा बोला जाता है. आंकड़े बताते हैं कि पसमांदा मुसलमानों की हालत समाज में बहुत अच्छी नहीं है. ऐसे मुस्लिम आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक हर तरह से पिछड़े और दबे हुए हैं.
ये जातियां पसमांदा में शामिल
मुसलमान समाज के पिछड़े वर्ग की सूची में 52 जातियां हैं जिन्हें पसमांदा मुस्लिम बोला जाता है. इनमें भटियारा, मोची, मनिहार, पैमदी, गुर्जर, राजगीर, गद्दी, मेवाली, रंगरेज, भड़भूजा, नालबंद, सिकलीगर, धोबी, शाह, फकीर, हम्माल, कसाई, राईन, गोली, सैफी, जुलाहा और शीशगर जातियां प्रमुख हैं.