विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विदेश नीति को लेकर पीएम मोदी की जमकर प्रशंसा की है. “मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी” पुस्तक में एस जयशंकर ने लिखा है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का साफ बोलना है कि वह आतंकवाद, विशेष रूप से सीमा पार से प्रेरित आतंकवाद को न तो नजरअंदाज करेंगे और न ही बर्दाश्त करेंगे. उनके इस दृढ़ संकल्प ने 2014 के बाद से पाक के प्रति हिंदुस्तान की नीति को नया आकार दिया है.
“मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी” पुस्तक में लिखते हुए जयशंकर ने विदेश सचिव बनने के बाद 2015 में ‘सार्क यात्रा’ के लिए जाने के दौरान प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए निर्देशों को याद किया है. उन्होंने लिखा कि पीएम ने मुझसे बोला कि उन्हें मेरे अनुभव और निर्णय पर बहुत भरोसा है, लेकिन इस्लामाबाद पहुंचने पर मुझे एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि वह अपने पूर्ववर्तियों से अलग थे. वे आतंकवाद को न तो नजरअंदाज करेंगे और न ही बर्दाश्त करेंगे.
जयशंकर ने इसमें चीन से जुड़े सीमा टकराव से निपटने में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपेक्षित संयम के बारे में भी लिखा है. उन्होंने इसमें बोला है कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के साथ सीमा टकराव सुलझाने के लिए अपेक्षित संयम का परिचय दिया है.
जयशंकर प्रसाद ने पुस्तक में लिखा है कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के अब तक के कार्यकाल में आतंकवाद के मामले को वैश्विक स्तर पर उठाया गया है. आठ वर्ष की मोदी गवर्नमेंट आतंकवाद के मामले को लेकर निष्पक्ष ढंग से वैश्विक बहस के केंद्र में लेकर आई. उन्होंने सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित किया है, क्योंकि पीएम जानते हैं कि हमारी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना महत्वपूर्ण है. ‘मोदी @20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी’ में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लिखा है प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में उचित विचार-विमर्श के बाद साफ तौर पर लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं और उनके निष्पादन की जिम्मेदारी वाले लोगों को अपेक्षित जगह दिया गया है. पुस्तक में उन्होंने लिखा है कि 2014 के बाद से बजट दोगुने से अधिक हो गया है. सड़कों का निर्माण भी 2008-14 की तुलना में 2014-21 की अवधि में लगभग दोगुना हो गया है.
इस पुस्तक में विदेश मंत्री एस जयसंकर ने चीन के साथ सीमा बुनियादी ढांचे के अंतर को स्वीकार करते हुए लिखा कि उन्होंने अनुभव किया है कि 1988 के बाद से हिंदुस्तान से बहुत आगे निकल गया है. कुछ जरूरी क्षेत्रों में दूरी कम होना प्रारम्भ हो गया है और परिचालन तैनाती अधिक व्यवहारिक हो गई है.
पुस्तक में उन्होंने बोला कि पीएम का पर्सनल सम्मान भी है जो दूसरों के रवैये को प्रभावित करता है. मंत्री ने बोला कि उनके साथी उन्हें सर्वोत्कृष्ट भारतीय मानते हैं और उसी के मुताबिक प्रतिक्रिया देते हैं. वे एक ऐसे व्यक्तित्व को परिभाषित करते हैं जिसे दुनिया पहचानने लगी है. उन्होंने लिखा कि मुझे याद है कि अमेरिकी नेता 2014 की यात्रा के दौरान उनके उपवास की आदतों के बारे में कितने मोहित थे. उन्होंने बोला कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व के नेताओं के साथ जो पर्सनल संबंध बनाए हैं, उन्होंने सीधे तौर पर हमारे राष्ट्र और लोगों के हितों को आगे बढ़ाया है.
यह पुस्तक प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के पिछले 20 सालों के सियासी जीवन को दर्शाती है, जिसमें गुजरात के सीएम के रूप में उनके कार्यकाल से लेकर हिंदुस्तान के प्रधान मंत्री तक शामिल हैं और इसे उद्योग और राजनीति के प्रख्यात बुद्धिजीवियों और व्यक्तित्वों द्वारा संकलित किया गया है. पुस्तक में सहयोग देने वालों में सुधा मूर्ति, सद्गुरु, नंदन नीलेकणी, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, दिवंगत महान गायिका लता मंगेशकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, उद्योगपति उदय कोटक, अदाकार अनुपम खेर, बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु और पीएम के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा शामिल हैं.