केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ अवधारणा को लेकर किए जा रहे झूठे प्रचार को खारिज करते हुए साफ किया कि आनें वाले चुनावों में इसे लागू नहीं किया जाएगा. चेन्नई में एक कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा- 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान करीब एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और एक साथ चुनाव कराकर इतने बड़े खर्च को बचाया जा सकता है.
‘एक साथ चुनाव होने पर जीडीपी में होगी बढ़ोतरी’
उन्होंने कहा, ‘अगर संसद और विधानसभा के सदस्यों के चुनाव के लिए एक साथ चुनाव कराए जाते हैं, तो राष्ट्र की जीडीपी में करीब 1.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी. मूल्य के लिहाज से अर्थव्यवस्था में 4.50 लाख करोड़ रुपये जुड़ेंगे. यह ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ अवधारणा का एक काला और सफेद उदाहरण है.‘ निर्मला सीतारमण ने कुछ पार्टियों पर ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पहल पर झूठा अभियान चलाने का इल्जाम लगाया.
‘2034 के बाद एक साथ चुनाव कराए जाने योजना’
उन्होंने साफ किया कि एक साथ चुनाव 2034 के बाद ही कराए जाने की योजना है और तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा अपनी स्वीकृति देने के लिए अभी से आधार तैयार किया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘इस अवधारणा पर कई मौकों पर व्यापक चर्चा हुई. यह पीएम मोदी की तरफ से प्रारम्भ की गई कोई चीज नहीं है. यह ‘एक देश एक चुनाव’ 1960 के दशक तक अस्तित्व में था. इसका आंख मूंदकर विरोध करने के बजाय, यदि इसके फायदा को देखते हुए इसका समर्थन किया जाता, तो ‘एक देश एक चुनाव’ की अवधारणा राष्ट्र को आगे ले जाती.‘
‘करुणानिधि ने किया था एक साथ चुनाव कराने का समर्थन’
निर्मला सीतारमण ने दावा किया कि दिवंगत डीएमके संरक्षक एम करुणानिधि ने ‘एक देश एक चुनाव’ की अवधारणा का समर्थन किया था, लेकिन उनके बेटे और मौजूदा सीएम (एम के स्टालिन) अपने पिता के नक्शेकदम पर नहीं चल रहे हैं और इसके बजाय इसका विरोध कर रहे हैं. सीतारमण ने दोहराया कि ‘एक देश एक चुनाव’ की अवधारणा किसी की ‘पसंदीदा’ परियोजना नहीं है, बल्कि राष्ट्र के कल्याण को ध्यान में रखते हुए इसकी योजना बनाई गई है.