पुणे (पीटीआई). नवंबर 1946 में मेरठ में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा फहराया गया खादी का तिरंगा 75 वर्ष बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया. 24 से 26 जुलाई तक पुणे के पास पिंपरी चिंचवाड़ में एक कॉलेज की प्रदर्शनी के दौरान 5,000 से अधिक लोग झंडा देखने आए थे. 9 x 14 फीट के झंडे में चरखे की एक छवि है और सुभाष चंद्र के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के तीसरे डिवीजन के ‘जनरल ऑफिसर कमांडिंग’ स्वर्गीय मेजर जनरल गणपत राम नागर के परिवार के पास यह झंडा रखा गया है.
1946 में फहराया गया था
मेजर जनरल नागर के पोते देव नागर ने पीटीआई को बताया कि बोस की 125वीं जयंती, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के 50 वर्ष पूरे होने और कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में झंडा लगाया गया था. नेहरू ने मेरठ में कांग्रेस पार्टी अधिवेशन में आईएनए ऑफिसरों की मौजूदगी में झंडा फहराया था. देव नागर ने कहा, “स्वतंत्रता पूर्व कांग्रेस पार्टी का सत्र 24 नवंबर, 1946 को मेरठ के विक्टोरिया पार्क में हुआ था, जहां प्रतिभागियों में आईएनए के पदाधिकारी शामिल थे. पंडित नेहरू ने खादी का तिरंगा केंद्र में ‘चरखा’ की छवि वाला फहराया था.”
देव नागर ने बोला कि उनके दादा को उस कार्यक्रम में प्रबंध की जिम्मेदारी दी गई थी. उन्होंने कहा, “सत्र के अंतिम दिन झंडा उतारा गया. नेहरू और आईएनए के जनरल शाहनवाज खान ने फिर इस पर हस्ताक्षर किए और इसे मेरे दादा को सौंप दिया, जो मेरठ के रहने वाले थे.” तब से नागर परिवार ने ध्वज को सुरक्षित रखा है. झंडा तब से हमारे पास है, सुरक्षित और अच्छी तरह से संरक्षित है.”
झंडे को यूं रखा गया है सेफ
देवनगर के अनुसार, नेहरू ने तब बोला था कि उन्होंने इसी झंडे के नीचे आजादी की लड़ाई लड़ी और यह राष्ट्र का राष्ट्रीय ध्वज होगा. राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंगों को बरकरार रखा गया था, जबकि चरखा को अशोक चक्र से बदल दिया गया था. नागर ने बोला कि परिवार ने पिछले 75 सालों के दौरान झंडे को धूल और नमी से दूर रखा. इसको नमी से दूर रखने के लिए सिलिका कारागार कैप्सूल के साथ रखा गया. यही नहीं कभी-कभी इसे धूप में बाहर भी रखा गया और फिर इसे वापस मोड़ कर रख दिया जाता है.’
300 वर्ष तक बना रह सकता है
देव नागर ने बोला कि वह अब झंडा बाहर लाने को लेकर परेशान हैं क्योंकि यह एक ‘मूल्यवान अवशेष’ है. उन्होंने बोला कि पुणे के एक संस्थान के ऑफिसरों ने ध्वज के संरक्षण की पेशकश की है. देव नागर ने कहा, “उन्होंने बोला कि यदि झंडे का ठीक से सहेजा जाए, तो यह 200 से 300 वर्ष तक चल सकता है.”