US Dollar Brics: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि ब्रिक्स राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी $ की स्थान किसी और मुद्रा के इस्तेमाल के बारे में ना सोचें। यदि उन्होंने अमेरिकी $ की स्थान कोई और करेंसी प्रयोग करने की प्रयास की तो वह उन पर 100 फीसदी टैरिफ लगा देंगे। ट्रंप ने बोला कि ब्रिक्स राष्ट्र ”कोई और मूर्ख देश” ढूंढ लें।
डॉलर से दूर जाने की प्रयास पड़ेगी भारी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, ”ब्रिक्स राष्ट्र $ से दूर जाने की प्रयास करें और हम खड़े होकर बस देखते रहें, इस तरह के विचारों के दिन समाप्त हो चुके हैं। हम ब्रिक्स राष्ट्रों से यह प्रतिबद्धता चाहते हैं कि वे न तो नई ब्रिक्स मुद्रा बनाएंगे न ही अमेरिकी $ की स्थान किसी अन्य मुद्रा का समर्थन करेंगे। नहीं तो, उन्हें 100 फीसदी शुल्क का सामना करना होगा या फिर बहुत बढ़िया अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बिक्री को अलविदा कहने की आशा करनी चाहिए।”
अमेरिकी $ की स्थान कोई नहीं ले सकता
ट्रंप ने साफतौर पर धमकी देते हुए कहा, ”वे (ब्रिक्स देश) कोई दूसरा मूर्ख राष्ट्र ढूंढ़ सकते हैं। इस बात की कोई आसार नहीं है कि ब्रिक्स अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में या कहीं और अमेरिकी $ की स्थान ले लेगा। हालांकि जो भी राष्ट्र ऐसा करने की प्रयास करेगा, उसे शुल्क को नमस्ते और अमेरिका को अलविदा कह देना चाहिए।”
ट्रंप ने ब्रिक्स सदस्य राष्ट्रों द्वारा अपनी मुद्रा जारी करने के किसी भी कदम की बार-बार आलोचना की है और यह अब तक का उनका सबसे कड़ा विरोध है। दिसंबर में भी ट्रंप ने ब्रिक्स राष्ट्रों को इस तरह के कदम के विरुद्ध चेतावनी दी थी। ब्रिक्स दस राष्ट्रों – ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात का एक अंतर-सरकारी संगठन है। 2009 में गठित ब्रिक्स एकमात्र प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय समूह है जिसका अमेरिका हिस्सा नहीं है।
ब्रिक्स मुद्रा बदलने की उठ रही मांग
पिछले कुछ सालों में इसके कुछ सदस्य राष्ट्र विशेष रूप से रूस और चीन अमेरिकी $ का विकल्प या ब्रिक्स मुद्रा बनाने की मांग कर रहे हैं। ब्रिक्स के एक जरूरी स्तंभ हिंदुस्तान ने बोला है कि वह ‘डी-डॉलराइजेशन’ (विश्व व्यापार और वित्तीय लेनदेन में $ के इस्तेमाल में गौरतलब कमी) के विरुद्ध है। विदेश मंत्री एस। जयशंकर ने दिसंबर में बोला था कि हिंदुस्तान कभी भी ‘डी-डॉलराइजेशन’ के पक्ष में नहीं रहा है और ब्रिक्स मुद्रा बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है.