फिलीपींस, ब्रूनेई, मलेशिया, ताइवान और वियतनाम ने दशकों से पूरे साउथ चाइना सी पर चीन के दावों पर प्रश्न उठाते रहे हैं. लेकिन हाल के सालों में तनाव काफी बढ़ गया है. चीन उस क्षेत्र पर बार-बार दावा करता है जिसे 9 डैश लाइन बोला जाता है. दक्षिण चीन सागर रणनीतिक रूप से सबसे जरूरी समुद्री क्षेत्रों में से एक है (इस पर बाद में अधिक जानकारी होगी) और चीन इस क्षेत्र पर अधिक शक्ति का दावा करने के लिए इस पर नियंत्रण करना चाहता है. अपनी ताकत के मद में चूर होकर चीन अब युद्ध के थर्ड फ्रंट को खोलने पर आमदा नजर आ रहा है. चीन की तरफ से फिलीपींस को सबक सिखाने के इरादे से अपने दूसरे विमान वाहक पोत शेनडोंग को फिलीपींस की तट के निकट तैनात कर दिया है. यह डेवलपमेंट तब देखा गया है जब मनीला ने बीजिंग के प्रतिदावों के खिलाफ, दक्षिण चीन सागर में एक विवादित तट पर अपने क्षेत्रीय दावों पर बल देने के प्रयासों को तेज कर दिया है.
फिलीपींस को टारगेट कर रहा चीन
ऐसा बताया जा रहा है कि चीन अपने इस कदम से ताइवान और फिलीपींस को टारगेट कर रहा है. सरकारी ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, चीनी जानकारों ने बोला कि वाहक की तैनाती एक निर्धारित अभ्यास का हिस्सा है, संभावित रूप से इसे पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में यात्रा के लिए तैयार किया जा रहा है. शेडोंग की तैनाती दक्षिण चीन सागर में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा प्रमुख सतह लड़ाकू जहाजों की तैनाती के बाद की गई है. मनीला के साथ बढ़ते समुद्री क्षेत्रीय संघर्ष के बीच, इसमें बड़े और मध्यम विनाशकारी और एक मुख्य उभयचर लैंडिंग जहाज शामिल हैं. शंघाई यूनिवर्सिटी ऑफ पॉलिटिकल साइंस एंड लॉ के रक्षा प्रोफेसर नी लेक्सियनग ने टिप्पणी की कि शेडोंग का मार्ग मनीला और वाशिंगटन दोनों के लिए एक निवारक के रूप में कार्य करता है, दूसरे थॉमस शोल पर तनाव के बीच ‘क्षेत्रीय समुद्री संप्रभुता की रक्षा के लिए चीन के दृढ़ संकल्प’ पर बल दिया.
फिलीपींस को अमेरिका का समर्थन
मनीला स्थित थिंक टैंक इंटरनेशनल डेवलपमेंट एंड सिक्योरिटी कोऑपरेशन के अध्यक्ष और संस्थापक चेस्टर कैबल्ज़ा ने बोला कि एक बार जब हम बड़े पैमाने पर सेना बल देखते हैं, तो इसका मतलब है कि बीजिंग युद्ध की तैयारी कर रहा है. उन्होंने वाहक की गश्त को बीजिंग की प्रदर्शनकारी राजनीति का उदाहरण बताया. हालिया चीन-फिलीपींस विवाद दक्षिण चीन सागर में उनके क्षेत्रीय दावों पर एक हिंसक मोड़ का प्रतीक है. पिछले महीने, दोनों राष्ट्रों के नौसैनिक जहाज आपस में टकरा गए थे, जो विदेशी जहाजों के विरुद्ध चीन के नए नियमों के बाद पहली घटना थी. ये नए नियम चीनी जलक्षेत्र का “उल्लंघन करने के शक में” विदेशियों को हिरासत में लेने की अनुमति देते हैं. इस संघर्ष में द्वितीय थॉमस शोल के पास फिलीपींस के नौसैनिक जहाज और एक चीनी जहाज की भिड़न्त शामिल थी. हाल के महीनों में दोनों राष्ट्रों की नौसेनाओं और तट रक्षकों का आमना-सामना हुआ है. फिलीपींस, अमेरिका के समर्थन से विवादित क्षेत्र पर अपना दावा जताने का कोशिश कर रहा है.
साउथ चाइना सी पर चीन का दावा
चीन दक्षिण चीन सागर के अधिकतर हिस्से पर दावा करता है, जिस रुख पर फिलीपींस, मलेशिया, वियतनाम, ब्रुनेई और ताइवान विवादित हैं. चीन का इल्जाम है कि फिलीपींस ने 1999 में जानबूझ कर दूसरे थॉमस शोल में एक नौसैनिक जहाज को घेर लिया, जिससे क्षतिग्रस्त जहाज को नौसैनिक कर्मियों द्वारा संचालित एक स्थायी प्रतिष्ठान में बदल दिया गया. फिलीपींस, अमेरिका द्वारा समर्थित, समुद्र के कानून पर संयुक्त देश कन्वेंशन (यूएनसीएलओएस) के एक न्यायाधिकरण द्वारा 2016 के निर्णय के आधार पर इस क्षेत्र का विरोध करता है, जिसने इसके अधिकारों का समर्थन किया था. हालाँकि, चीन, जिसने न्यायाधिकरण का बहिष्कार किया था, ने इसके निष्कर्षों को खारिज कर दिया है और अपने दावों पर बल देता है.