फ्रांस में गवर्नमेंट बनाने की जोर-आजमाइश चल रही है। इस रेस में जॉर्डन बार्डेला के नाम की चर्चा खूब हो रही है। 28 वर्ष के नेता जॉर्डन बार्डेला ने फ्रांस में दक्षिणपंथी नेशनल रैली को सबसे मजबूत करने में पूरा दम-खम लगा दिया। जानकारों की मानें तो अब वह राष्ट्र के सबसे युवा पीएम बन सकते हैं।
फ्रांस में विधायी चुनावों के प्रथम चरण में मतदाताओं ने मरीन ले पेन की नेशनल रैली को मजबूत बढ़त दिला दी है। अब बारडेला ने 7 जुलाई को निर्णायक चरण में अपनी पार्टी को पूर्ण बहुमत दिलाने के लिए समर्थकों को एकजुट करना प्रारम्भ कर दिया। बता दें कि जब बार्डेला ने 2022 में अपनी गुरु मरीन ले पेन की स्थान फ्रांस की अग्रणी दक्षिणपंथी पार्टी की कमान संभाली तो सब दंग थे। क्योंकि आधी सदी पहले पार्टी की स्थापना के बाद से ले पेन नाम के बिना इसका नेतृत्व करने वाले वह पहले आदमी बन गए।
अब नेशनल रैली (RN) के नेता जॉर्डन बार्डेला पीएम बनने के लिए तैयार दिख रहे हैं। 28 वर्ष की कम उम्र में यह जरूरी उपलब्धि उनकी पार्टी के बहुमत हासिल करने पर निर्भर करती है, जो कि एग्जिट पोल के मुताबिक एक बड़ी आसार है। बार्डेला की आरंभ साधारण रही है। पेरिस के बाहरी क्षेत्र में रहने वाले बार्डेला का बचपन गरीबी में गुजरा है। साधारण से परिवार में जन्मे बार्डेला ने RN के शीर्ष पर पहुंचने तक बहुत तेज़ी से तरक्की की। अकेली मां द्वारा पले-बढ़े से लेकर राष्ट्र के संभावित पीएम बनने तक की उनकी गरीबी से अमीरी तक की कहानी ने कई मतदाताओं को प्रभावित किया है।एएफपी के मुताबिक युवा राजनेता ने नस्लवाद और यहूदी-विरोधी भावना से लंबे समय से दागदार आरएन पार्टी की छवि को फिर से जीवंत करने में सहायता की है। उनकी देखरेख में, नेशनल रैली (RN) ने इस महीने के यूरोपीय चुनावों में रिकॉर्ड स्कोर हासिल किया और रविवार (30 जून) को विधायी चुनावों के पहले दौर में जीत हासिल की।के मुताबिक जॉर्डन बार्डेला 16 वर्ष की उम्र में नेशनल फ्रंट में शामिल हो गए। उनकी प्रसिद्धि तब बढ़ी जब 23 वर्ष की उम्र में उन्होंने 2019 के यूरोपीय चुनावों में राष्ट्रपति मैक्रोन की पार्टी को पछाड़ते हुए आरएन को शीर्ष जगह पर पहुंचाया। 2022 में बार्डेला ने पार्टी के सदस्यों के लगभग 85 फीसदी वोट जीतकर आरएन के भीतर अपने नेतृत्व को मजबूत किया। वे मरीन ले पेन के बाद पार्टी अध्यक्ष बन गए।अपनी समझदारी और मीडिया में अपनी दमदार मौजूदगी के लिए प्रसिद्ध बार्डेला।। मैक्रों प्रशासन के लिए एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं। बार्डेला के चलते उनकी पार्टी ने पेंशनभोगियों, युवाओं और यूनिवर्सिटी के स्नातकों के बीच अपने वोट का विस्तार किया। बार्डेला ने बोला था कि वे सभी फ्रांसीसी लोगों का पीएम बनना चाहते हैं, लेकिन समझौता नहीं करना चाहते।